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मुख्यमंत्री बोले, स्टोक्स-कौल सिंह ने हटाए जिला अध्यक्ष

Sun, 04 Dec 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो जिला अध्यक्षों को हटवाने के लिए वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स और कौल सिंह ठाकुर को जिम्मेवार ठहराया है। कहा कि पहले दोनों ने ही इन्हें नियुक्तियां दीं और अब इन्हें हटवा दिया है। वे खुद किसी को नहीं हटाते, बल्कि जोड़ते ही हैं।
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वीरभद्र सिंह ने यह जानकारी शिमला जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष पद से केहर सिंह खाची और मंडी जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद से पूर्ण चंद को हटाने के मामले में पूछे गए सवाल पर दी। वे शनिवार को शिमला के रिज मैदान पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। सीएम से प्रदेश कांग्रेस में हुए फेरबदल पर सवाल किया गया तो बोले कि केहर सिंह खाची और पूर्ण चंद को असल में हटाया नहीं गया है। उन्हें एक जगह से दूसरे स्थान पर भेजा है।

क्या इस बदलाव को आपके नोटिस में लाया गया? इस पर सीएम ने ‘नो’ कहा। बोले - यह कहा जा रहा है कि वीरभद्र सिंह के समर्थकों केहर सिंह खाची और पूर्ण चंद को हटाया गया है। इस पर मैं यही कहूंगा कि मुझे सभी से प्यार है। मैं सभी को अपना समर्थक समझता हूं। खाची को बनाया भी विद्या स्टोक्स ने था और आज वे हटे भी उन्हीं की वजह से हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के कारण धूमल की संपत्ति की जांच रुकी

पूर्ण चंद को भी कौल सिंह ठाकुर ने बनाया और मुझे नहीं पता उनके बीच क्या हुआ? आज हटवाने वाले भी वही हैं। मैं तो जोड़ने वाला हूं। हटाने वाला नहीं।  कांग्रेस कार्यालय से शुक्रवार को प्रेस बयान जारी किया गया था कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंजूरी से तीन संगठनात्मक जिला कांग्रेस अध्यक्षों

को उनकी सेवाओं को देखते हुए पदोन्नत कर प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत किया है। ये केहर सिंह खाची, पूर्णचंद ठाकुर और टेक चंद डोगरा हैं। तीनों संगठनात्मक जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें प्रकाश ठाकुर जिला शिमला ग्रामीण, दीपक शर्मा जिला मंडी और पवन ठाकुर को जिला सुंदरनगर का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।    पूर्व सीएम प्रेमकुमार धूमल की संपत्ति पर बैठाई जांच पर सीएम वीरभद्र सिंह बोले - सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित एक मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाने की वजह से ही ऐसा हुआ है। विमुद्रीकरण पर कहा कि इससे हिमाचल की अर्थव्यवस्था में भी फर्क पड़ा है। अभी जो भारत सरकार ने कदम उठाया है, उससे करेंसी का प्रवाह कम हो गया है।
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