सांसद शांता कुमार के बाद अब मुख्यमंत्री
वीरभद्र सिंह भी धर्मशाला में 19 मार्च को प्रस्तावित भारत-पाकिस्तान टी-20
वर्ल्ड कप मैच के खिलाफ हो गए हैं। बुधवार को पालमपुर में मीडिया से
बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मैच के आयोजन से अगर शहीदों के
परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं तो वे नहीं चाहते कि धर्मशाला में मैच हो।
हालांकि, कांगड़ा प्रवास के पहले दिन धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत
में मुख्यमंत्री ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच मैच होना चाहिए।
गौरतलब है कि शांता कुमार जैसे कई नेताओं ने धर्मशाला में प्रस्तावित
भारत-पाक मैच पर एतराज जताया है। शहीदों के परिजनों में बढ़ते रोष के चलते
अब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपना रुख बदल लिया है। उधर, पालमपुर में
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि राज्य के लोगों को जाति, धर्म और
संस्कृति के नाम पर बांटा जा रहा है। ऐसे लोग देश के सबसे बड़े शत्रु हैं।
सीएम ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में जब विकास की गाथा लिखी जाएगी तो
कांग्रेस का नाम सबसे पहले होगा।
भावनात्मक एकता को तपोवन में बनाया विधानसभा भवन: सीएम
पालमपुर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि शिमला के अलावा धर्मशाला
में विधानसभा भवन स्थापित होना महत्वपूर्ण है। कुछ लोग इसे लेकर भी बातें
उठाते हैं कि तपोवन में बना विधानसभा भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है। हाथी
सफेद हो, चाहे नीला, लेकिन हाथी तो हाथी ही है न। तपोवन में विधानसभा परिसर
का निर्माण सामाजिक, राजनीतिक और भावनात्मक एकता की दिशा में उठाया गया
बड़ा निर्णय है।
सरकार विधानसभा परिसर में सम्मेलन कक्ष स्थापित करने पर
विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने अपरोक्ष रूप से विधानसभा अध्यक्ष बुटेल उनके
बयान का जवाब दिया है। गौर रहे कि विधानसभा सत्र के दौरान विस अध्यक्ष
बीबीएल बुटेल ने तपोवन विधानसभा परिसर को सफेद हाथी कहा था। प्रदेश सरकार
के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर में 25
जनवरी को कार्यक्रम का आयोजन होगा।
नए सिरे से हो जिलों का पुनर्गठन : शांता
प्रदेश में जिलों पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बयान आने के बाद भाजपा के
वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने भी प्रतिक्रिया जताई है। धर्मशाला के पास सकोह
में कार्यक्रम के दौरान शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल में जिलों की संख्या
बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा करने से सिर्फ धन की ही बर्बादी होगी।
शांता ने कहा कि सूबे के छोटे और बडे़ जिलों को एक बराबर करने के लिए नए
सिरे से जिलों का पुनर्गठन किया जा सकता है।
इसके लिए बाकायदा आयोग का गठन
होना चाहिए। पुनर्गठन में जिलों की संख्या नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। जिले
सिर्फ 12 ही रहने चाहिए। लोगों को ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी नहीं बल्कि
सुविधाएं की जरूरत है। शांता कुमार ने आतंकवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा
कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर का सात वर्ष बाद निर्माण नहीं हो
पाया, यह दुख की बात है। राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से सीयू के भूमि का
चयन नहीं हो पाया है।