मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विश्व का सबसे ऊंचा चायल क्रिकेट मैदान आर्मी के सपुर्द नहीं होगा। मिलिट्री स्कूल चायल के 89वें सालाना समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश सरकार स्कूल परिसर के विस्तार को भूमि उपलब्ध करवाने के लिए तैयार है, बशर्ते चायल क्रिकेट मैदान राज्य सरकार के पास रहेगा।
वर्तमान में इस क्रिकेट ग्राउंड की देखरेख का जिम्मा और कब्जा भारतीय सेना के पास है जबकि प्रदेश सरकार अपनी भूमि होने का दावा करती है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि चायल बाजार और इसके साथ लगते क्षेत्र को वन क्षेत्र से बाहर करने के बारे में प्रदेश सरकार गौर करेगी।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि मिलिट्री स्कूल चायल का गौरवमयी इतिहास रहा है। उच्च परंपरा के चलते यहां से सशस्त्र सेनाओं और अन्य क्षेत्रों में बहुत से विद्यार्थियों ने उच्च पदों को हासिल किया है। मिलिट्री स्कूल चायल भारत के पांच राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों में से एक है।
महाराजा पटियाला ने कराया था मैदान का निर्माण
चायल क्रिकेट मैदान को दुनिया का सबसे ऊंचा मैदान होने का दर्जा प्राप्त है। यह समुद्र तल से करीब 2444 मीटर ऊंचाई पर है। इसका निर्माण 1893 में महाराजा पटियाला भूपेंद्र सिंह ने करवाया था।
इसका निर्माण उस समय हुआ जब महाराजा पटियाला को शिमला से निष्कासित किया गया और उन्होंने चायल को अपनी समर कैपिटल बनाया। जहां से शिमला भी देखा जा सकता था। इस मैदान की देखरेख आर्मी कर रही है।