मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि बिलासपुर में खुलने वाले एम्स के लिए केंद्र सरकार देरी कर रही है। प्रदेश सरकार ने तो जमीन का इंतकाल भी एम्स के नाम कर दिया है। उनके सीएम होने और विधानसभा चुनाव के चलते भाजपा शिलान्यास नहीं करवा रही है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर एम्स का शिलान्यास हो गया तो पट्टिका में वीरभद्र सिंह का नाम भी आ जाएगा। इससे केंद्र में बैठे बिलासपुर के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अहमियत कम हो जाएगी।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कंदरौर में स्कूल की वेबसाइट को लांच करने के बाद जनता को संबोधित कर रहे थे। कहा कि विकास में राजनीति को नहीं लाना चाहिए।
अगर केंद्र सरकार इसी डर से एम्स का शिलान्यास नहीं कर रही है कि शिलान्यास पट्टिका में वीरभद्र का नाम आ जाएगा तो वह शिलान्यास के समय वे स्वयं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को निमंत्रण भेजेंगे।
पट्टिका में उनका नाम भी लिखवाने के साथ उन्हीं से शिलान्यास करवाएंगे। सीएम ने कहा कि प्रदेश के विकास में पिछड़ने नहीं दिया जाएगा। एक-एक पैसा जोड़कर प्रदेश का विकास करवाया है। इसके चलते आज हिमाचल देश भर में विकास की दौड़ में पहले स्थान पर है।
एथलेटिक्स पवेलियन मामले में मुख्यमंत्री ने विभाग को लगाई फटकार
गोबिंदसागर तट पर लुहणू में करोड़ों रुपये की लागत से बने एथलेटिक्स पवेलियन को खेल विभाग के अधीन करने में वर्षों की देरी के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को पवेलियन की मरम्मत करने के आदेश दिए हैं।
पूरे मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सीएम वीरभद्र सिंह ने संबंधित विभाग को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। वहीं इस संबंध में हिमुडा को भी तलब किया जाएगा कि सालों से पवेलियन को खेल विभाग के हैंड ओवर क्यों नहीं किया गया। अमर उजाला ने इस मुद्दे को 23 जुलाई के अंक में प्राथमिकता के आधार पर प्रकाशित किया था।
इसके बाद वीरवार को सीएम दौरे के दौरान रामलाल ठाकुर ने इस संबंध में कड़े कदम उठाने की मुख्यमंत्री से मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने आदेश जारी किए हैं। गौर रहे कि उक्त पवेलियन पर सरकार ने करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये खर्च किया था। हालांकि हिमुडा ने वर्ष 2007 में दोनों पवेलियन बनाकर तो तैयार कर दिए।
मगर आज तक इस स्पोर्ट्स विभाग के हवाले नहीं किया गया। इस कारण अब उचित रखरखाव न होने के कारण यह जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। हालांकि दो साल पूर्व सीएम ने बिलासुपर दौरे के दौरान हिमुडा को दोनों पवेलियन स्पोर्ट्स विभाग के हवाले करने को कहा था।
मगर इसके बाद भी हिमुडा ने सीएम के आदेशों को दरकिनार करते हुए आज तक इसे खेल विभाग के हवाले नहीं किया। बिलासपुर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए करीब एक दशक पहले उक्त दोनों पवेलियनों का निर्माण किया गया था।
अब हालत ऐसी है कि पवेलियन से सरकारी संपत्ति को चोर उड़ाकर ले गए हैं। जबकि लावारिस पशुओं ने यहां डेरा जमा रखा है। मगर अब सीएम ने इस संबंध में कड़े आदेश जारी किए हैं। इससे खिलाड़ियों में उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही पवेलियन की सुविधा मिलेगी।