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खराब रिजल्ट पर सीएम ने शिक्षकों को दी नसीहत, एक-एक कर गिनाईं खामियां

Fri, 27 May 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकार के पास शिक्षकों के सक्रिय राजनीति में शामिल होने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सरकारी स्कूलों में बेहतर नतीजे देने के लिए वीरवार को राजधानी के होटल पीटरहॉफ में आयोजित बैठक में शिक्षकों को खूब नसीहतें दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक राजनीति से दूर रहें। शिक्षकों को तटस्थ रहना चाहिए।
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खुद को राजनीतिक दलों में नहीं बांटना चाहिए। सिर्फ बच्चों की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। शिक्षक खुद को सरकारी नौकर न समझे। इन पर बच्चों के भविष्य निर्माण का अहम जिम्मा है। हर बच्चा मेरिट में नहीं आ सकता।

लेकिन पहली डिविजन में बच्चों को लाने के लिए सभी शिक्षकों को जोर लगाना चाहिए। सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकार के पास शिक्षकों के सक्रिय राजनीति में शामिल होने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
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इसे लेकर शिक्षक विशेष ध्यान दें। शिक्षक तनख्वाह के लिए काम न करें, तनख्वाह तो उन्हें हर महीने मिलती ही रहेगी। शिक्षकों को बच्चों की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए।

पांचवीं के बच्चों को दूसरी की किताब पढ़नी नहीं आती

केस स्टडी में बताते हैं कि पांचवीं कक्षा के बच्चों को दूसरी और तीसरी कक्षा की किताबों को पढ़ना तक नहीं आता है। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से प्राथमिक पाठशालाओं में मासिक अथवा त्रैमासिक परीक्षा प्रणाली आरंभ करने के पक्षधर हैं, ताकि उनके प्रदर्शन का बेहतर आंकलन किया जा सके।

प्रत्येक बच्चे के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने तथा कमजोर विद्यार्थियों के प्रति और अधिक ध्यान देने के साथ-साथ अध्यापकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की भी आवश्यकता है। केस स्टडी में बताते हैं कि पांचवीं कक्षा के बच्चों को दूसरी और तीसरी कक्षा की किताबों को पढ़ना तक नहीं आता है।

बच्चों पर चेक नहीं होने के चलते नवीं और दसवीं में नतीजे खराब हो रहे हैं। स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाना और बिगाड़ना शिक्षकों के हाथ में है। मुख्यमंत्री ने फागली में 8 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले संस्कृत कालेज की आधारशिला भी रखी।

इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती, अतिरिक्त मुख्य सचिव पीसी धीमान, निदेशक उच्च शिक्षा दिनकर बुराथोकी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा मनमोहन शर्मा, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष बलवीर तेगटा, शिक्षा सचिव राकेश शर्मा, सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक घनश्याम चंद सहित कई इस अवसर पर मौजूद रहे।
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सिरदर्द वाला पोर्ट फोलियो है शिक्षा विभाग

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग सिरदर्द वाला पोर्ट फोलियो है। कोई भी मुख्यमंत्री इस विभाग को अपने पास नहीं रखता है। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग सिरदर्द वाला पोर्ट फोलियो है। कोई भी मुख्यमंत्री इस विभाग को अपने पास नहीं रखता है। उन्होंने शिक्षा विभाग अपने पास इसलिए रखा है ताकि शिक्षकों और विद्यार्थियों को समस्याओं से न जूझना पड़े। गुणात्मक शिक्षा देना उनकी प्राथमिकताओं में है।

और स्कूल, कॉलेज खोलने की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में काफी संख्या में स्कूल और कॉलेज खोल दिए गए हैं। अब और अधिक जरूरत नहीं लग रही है। खोले गए स्कूलों को ही अब सुदृढ़ करने पर जोर दिया जाएगा। अगर कहीं बहुत अधिक जरूरत होगी, तभी शिक्षण संस्थान खोले जाएंगे। अब विशेष संस्थान ही खोले जाएंगे।

स्मार्ट सिटी में शामिल होने के प्रयास करे शिमला
शिमला। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मशाला का स्मार्ट सिटी में चयन होना अच्छी बात है। अब शिमला को क्वालिफाई करना है। शिमला को प्रोजेक्ट में शामिल करने के लिए अफसरों को पूरी निष्ठा से प्रयास करने चाहिए।
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