पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 71वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला में राजीव गांधी इल्यूमिनेटिंग स्कीम फॉर हिल टाउन एडवांसमेंट (रिश्ता) योजना का शुभारंभ किया। प्रदेश के शहरी विकास विभाग की यह योजना उत्तर भारत की पहली योजना है। इससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ राज्य को आर्थिक लाभ भी होगा। शहरी विकास विभाग ने एनर्जी एफिशियेंट सर्विसिज लिमिटेड (ईईएसएल) के सहयोग से यह पहल की है।
योजना के तहत ईईएसएल पूंजी निवेश करेगा। राज्य की नगरपालिकाएं एलईडी लाइटों के माध्यम से ऊर्जा एवं लागत बचत से सात वर्षों में इस धनराशि को वापस करेंगी। सीएम ने कहा कि यह योजना शिमला, धर्मशाला, सुंदरनगर, पांवटा साहिब, हमीरपुर, घुमारवीं और मनाली में तुरंत प्रभाव से कार्यान्वित की जाएगी।
अन्य शहरों को 31 मार्च, 2016 से पूर्व यह सुविधा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें स्थापित करने की पहल के लिए शहरी विकास विभाग के प्रयास सराहे। कहा कि यह सेवा ई-जिला परियोजना, निशुल्क वाई-फाई सेवा के तहत पूर्णतया कंप्यूटरीकृत होगी।
इससे शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली में सुधार लाने में सफलता मिलेगी। सरकार सभी कस्बों को कचरा मुक्त बनाने और लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। आश्वासन दिया कि शहरी विकास विभाग में रिक्त पद शीघ्र भरे जाएंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास मनीषा नंदा, शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने योजना की जानकारी दी। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स, सीपीएस नंदलाल एवं मनसाराम, विधायक बलवीर वर्मा, नगर निगम शिमला के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर, एनर्जी एफीशियेंट सर्विसिज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार सहित अन्य भी मौजूद रहे।
ईईएसएल के साथ हुआ समझौता- शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने योजना की शुरुआत करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने विभाग की ओर से भविष्य में किए जाने वाले विभिन्न प्रयासों की संक्षिप्त जानकारी दी। कहा कि योजना के लिए ईईएसएल के साथ राज्यस्तरीय समझौता हस्ताक्षरित हो चुका है। स्थानीय शहरी निकायों एवं प्रदेश के शेष शहरों को वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा।
63,484 स्ट्रीट लाइटों को बदलेंगे- वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी स्थानीय शहरी निकायों में 63,484 स्ट्रीट लाइटों को एलईडी लाइटों से बदला जाएगा। इससे 45-55 प्रतिशत तक बिजली की बचत होगी। प्रतिवर्ष 3.20 करोड़ का आर्थिक होगा। इसके संचालन एवं रखरखाव से हर वर्ष 6.5 करोड़ की बचत होगी। एलईडी लाइटों का संचालन एवं रखरखाव केंद्रीयकृत नियंत्रण एवं निगरानी प्रणाली के तहत होगा।