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सीएम वीरभद्र के इनकम टैक्स मामले की दो सप्ताह टली सुनवाई

Fri, 04 Aug 2017 10:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की साल 2009-2010 की आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट करने के इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह तक के लिए टल गई है। वीरभद्र सिंह ने इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के 8 दिसंबर 2016 को पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। वीरभद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने मामले की पैरवी की। वीरभद्र सिंह ने ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ अपील दायर कर उनकी आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।

कोर्ट ने 20 जनवरी को पारित आदेशों में दोबारा असेसमेंट किए जाने पर रोक नहीं लगाई थी। यह स्पष्ट किया था कि विभाग अपने निर्णय के अनुसार आगामी कार्रवाई जारी रख सकता है, लेकिन उनकी अंतिम कार्रवाई इस अपील के अंतिम निपटारे पर निर्भर करेगी।
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अब विभाग का कहना है कि उन्होंने वीरभद्र सिंह की आयकर रिटर्न का दोबारा असेसमेंट कर लिया है इसलिए इस अपील में कुछ भी निर्णय के लिए नहीं बचता। आयकर विभाग की दलील है कि अब प्रार्थी चाहे तो वह अपनी दोबारा असेस की गई आय को उपयुक्त फोरम में चुनौती दे सकता है। 

देहरा अस्पताल में स्टाफ की कमी पर सरकार से जवाब तलब
कांगड़ा जिले के सिविल अस्पताल देहरा में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ  की कमी को लेकर दायर याचिका में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रार्थी अरविंद धीमान द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए। 

प्रार्थी के अनुसार सिविल अस्पताल देहरा में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इस अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को छोटे-छोटे इलाज के लिए मीलों दूर टांडा अस्पताल जाना पड़ता है। प्रार्थी के अनुसार सिविल अस्पताल देहरा में डॉक्टरों के 9 पद स्वीकृत हैं लेकिन वहां केवल 4 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। 

ट्रेंड दाई, रेडियोग्राफर, लेडी गायनोकोलॉजिस्ट और सर्जन की भी कमी है। प्रार्थी के अनुसार लाखों की आबादी के लिए बने इस अस्पताल में सुविधाओं का अभाव दर्शाता है कि सरकार लोगों के स्वास्थ्य के प्रति कितनी संवेदनशील है। प्रार्थी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाए ताकि सिविल अस्पताल देहरा में डॉक्टरों व अन्य स्टाफ  की शीघ्र नियुक्ति की जाए।
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