मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास ओकओवर में जन समस्याएं सुनीं। प्रदेश के कई क्षेत्रों से आए लोगों से मुख्यमंत्री ने दोपहर तक मुलाकात की। हर मंगलवार और शुक्रवार को ओक ओवर में जनता का दरबार लगाया जाता है।
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. प्रेम शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री से हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में बैठने की आयु सीमा 42 साल से बढ़ाकर 45 साल करने की मांग की गई।
मुख्यमंत्री को पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान और गुजरात की नीति से अवगत कराया गया। इन राज्यों में प्र्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए 45 साल की आयु सीमा तय है। शिक्षक महासंघ ने मुख्यमंत्री से बाल सेविकाओं और बाल सहायिकाओं को सुपरवाइजर के पदों पर समायोजित करने की मांग की।
डा. प्रेम शर्मा ने बताया कि यह बाल सेविकाएं 30 सालों से हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद के तहत अपनी सेवाएं शिशु पालन केंद्रों में मात्र 1500 रुपये प्रतिमाह और बाल सहायिकाएं 600 रुपये प्रति माह ऑनरेयिम पर सेवाएं दे रहे हैं। प्र्रतिनिधिमंडल में चतर सिंह पंवार, सत्या भोटका, सत्या कंवर, लता शर्मा सहित कई अन्य शामिल रहे।