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कोल डैम विस्थापितों को सुन्नी में प्लॉट देगी सरकार

Wed, 10 Feb 2016 08:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कोल डैम विस्थापितों को शिमला के सुन्नी में प्लॉट दिए जाएंगे। सतलुज नदी पर कोल डैम बनने के कारण बेघर हुए जिन लोगों को अभी तक मकान नहीं मिल पाए हैं, उन्हें राज्य सरकार राहत देने जा रही है। विश्वकर्मी कल्याण बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह एलान किया है।
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उन्होंने कहा कि शेष बचे कोल डैम विस्थापितों को निकट भविष्य में शिमला जिले की पुनर्वास कालोनी सुन्नी में प्लॉट प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भूमिहीन परिवारों को ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा भूमि सुनिश्चित करने के लिए सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने तहसील करसोग की ग्राम पंचायत बिंदला में राजकीय माध्यमिक पाठशाला तलेहन को राजकीय उच्च पाठशाला स्तरोन्नत करने और मंडी जिले के सरकाघाट के अप्पर कलोट में महिला मंडल भवन के निर्माण की घोषणाएं कीं।
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनी राम शांडिल ने उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत किया और विश्वकर्मी कल्याण बोर्ड की प्रथम बैठक के लिए मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। मुख्य सचिव पी. मित्रा इस दौरान मौजूद रहे।

अब डुमना के स्थान पर होगा लोहार उपजाति का इंद्राज- बैठक में मंडी जिले के तत्तापानी और रंडौल गांवों के विश्वकर्मी परिवारों की उपजातियों की राजस्व रिकार्ड में दुरुस्तगी करवाने और डुमना के स्थान पर लोहार उपजाति का इंद्राज करवाने का निर्णय लिया गया। पहले से आवंटित नौतोड़ भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने का निर्णय भी लिया गया।

वाल्मीकि परिवारों को मकान बनाने के लिए मिलेगी जमीन- मुख्यमंत्री वीरभद्र्र सिंह ने कहा कि मकान बनाने के इच्छुक वाल्मीकि समुदाय के सभी परिवारों को ग्रामीण अथवा शहरी क्षेत्रों में भूमि प्रदान की जाएगी। बोर्ड के सदस्यों की ओर से आपत्ति उठाने पर मुख्यमंत्री ने पंचायतों को प्रदान किए जाने वाले महर्षि वाल्मीकि स्वच्छता पुरस्कार का नाम बदलकर कोई और नाम रखने के निर्देश दिए।

बैठक में राज्य में पीढ़ियों से रह रहे वाल्मीकि समुदाय के लोगों को बोनाफाइड प्रमाणपत्र प्रदान करने की प्रक्रिया पर विचार करने का निर्णय भी लिया गया है। उन्होंने समुदाय की समस्याओं का तीन महीनों के भीतर समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

जिनके पास राज्य में कोई भूमि नहीं है, ऐसे वाल्मीकि परिवारों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र प्रदान करने की अधिसूचना में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ (कर्नल) धनीराम शांडिल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्य सचिव पी. मित्रा उपस्थित थे।

नाहन में बनेगा महर्षि वाल्मीकि मंदिर- मुख्यमंत्री ने नाहन स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर की मरम्मत के लिए समुचित धनराशि प्रदान करने का आश्वासन दिया। नाहन के मोहल्ला रविदास के वार्ड नंबर 11 के बच्चों को प्राथमिक पाठशाला के निर्माण के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि का पता लगाने का आश्वासन दिया गया।

उन्होंने इंदौरा में कब्रिस्तान के लिए भूमि की संभावना का पता लगाने और धर्मशाला के योल में सैन्य अधिकारियों से इस समुदाय के लोगों के विभिन्न मुद्दों को उठाने के लिए कांगड़ा के उपायुक्त को निर्देश दिए।
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