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सीबीआई कार्रवाई के खिलाफ पत्नी के साथ कोर्ट पहुंचे वीरभद्र

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आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई कार्रवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पत्नी प्रतिभा सिंह के साथ बुधवार को हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट से एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई है। इस मामले की सुनवाई वीरवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति सुरेश्वर सिंह ठाकुर की खंडपीठ में होगी।
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अदालत से आग्रह किया है कि उनके खिलाफ चल रही जांच वास्तव में सीबीआई के क्षेत्राधिकार में नहीं आती। यह मामला आयकर विभाग और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है। दलील दी गई है कि वे मुख्यमंत्री हैं और उनके खिलाफ इस तरह का आपराधिक मामला चलाने से पूर्व राज्य सरकार की अनुमति लेना कानूनन जरूरी था।

मुख्यमंत्री ने अपील में ये दीं दलीलें

अनुमति लिए बगैर उनके निजी आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी नहीं की जा सकती थी। सीबीआई की प्रारंभिक जांच और उसके आधार पर दर्ज की गई प्राथमिकी कानूनन सही नहीं है। सीबीआई की कार्रवाई दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट एक्ट की धारा 6 और सीबीआई मैनुअल के विपरीत है। इसलिए उनके खिलाफ अभी तक सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई को गैर कानूनी ठहराते हुए रद्द किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के खिलाफ 23 सितंबर को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), 13(1) और आईपीसी की धारा 109 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके बाद उनके शिमला स्थित निजी आवास के अलावा 10 अन्य ठिकानों पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने संयुक्त रूप से छापेमारी की थी।

वीरभद्र ने प्राथमिकी की प्रति लेने के लिए दायर आवेदन लिया वापस

नई दिल्ली (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दर्ज मामले की प्राथमिकी की प्रति लेने के लिए दायर आवेदन वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देश पर दस्तावेज व प्राथमिकी के निरीक्षण से वे संतुष्ट हैं और अब उसकी जरूरत नहीं है।

पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एससी राजन के समक्ष पेश मुख्यमंत्री के अधिवक्ता ने कहा कि अदालत के 28 सितंबर के आदेश के बाद अब प्राथमिकी की प्रति की जरूरत नहीं है। ऐसे में उन्हें आवेदन वापस लेने की इजाजत दी जाए। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर लिया।
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6.1 करोड़ रुपये आय से अधिक अर्जित करने का आरोप

गौरतलब है कि सीबीआई ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व एलआईसी एजेंट आनंद चौहान व चुन्नी लाल चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मुख्यमंत्री पर वर्ष 2009 से 2011 यूपीए के कार्यकाल में केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए 6.1 करोड़ रुपये आय से अधिक अर्जित करने का आरोप है।

यह रकम उन्होंने अपने व अपने परिजनों के नाम से एलआईसी पॉलिसी में निवेश की थी। गत 26 सितंबर को सीबीआई ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के दिल्ली व शिमला स्थित निवास समेत 10 जगहों पर छापेमारी की है।
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