प्रदेश सरकार बाल आश्रमों तथा पालक देखभाल कार्यक्रम के अंतर्गत बेसहारा बच्चों की पैतृक संपत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने को हरसंभव कदम उठाएगी। यह बात बुधवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अनाथाश्रमों में रह रहे बच्चों के लिए लिए खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के समापन समारोह में कही।
कहा कि इन बच्चों की संपत्ति की सूची प्राप्त की जा रही है। यह देखा जाएगा कि संपत्ति उनके नाम रहे और किसी व्यक्ति की ओर से बेची अथवा हथियाई न जाए। सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल उद्धार योजना में संशोधन किया गया है। इसके अनुसार जमा दो के बाद अनाथ बच्चों की समुचित आजीविका सुनिश्चित बनाने को उनके व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का खर्च सरकार वहन करेगी।
उनकी शिक्षा का खर्च भी उठाएगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल एवं सांस्कृतिक स्पर्धाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किए। राज्य के विभिन्न बाल एवं बालिका आश्रमों से 398 बच्चों ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया था।
निर्माणाधीन बालिका आश्रम मशोबरा (आदर्श बाल गृह) का कार्य शीघ्र पूरा करने के लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि भवन निर्माण 2017 ग्रीष्मकाल तक पूरा होना चाहिए। मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि शिमला के हीरानगर में किशोर बच्चों के लिए संप्रेक्षण गृह शीघ्र क्रियाशील बनाया जाएगा। राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव राजकुमारी सोनी भी मौजूद रहीं।