...हम गरीब हैं, मेहनत मजदूरी करके खाते हैं। हमसे मजाक तो मत करो। पिछले दस साल से जीवन साथी के बिछुड़ने का दर्द और एक बेटे और तीन बेटियों के भरण-पोषण का बोझ लिए विधवा विमला देवी को अपनी होनहार बेटी बख्शो देवी के सुर्खियों में आने से कुछ उम्मीद जगी थी।
लेकिन सरकारी सिस्टम को जंग खा गया। बख्शो ने नंगे पांव जीरो डिग्री तापमान में बिना किसी किट के जिला स्तर पर दौड़ प्रतियोगिता जीती थी। बख्शो के रातोंरात सुर्खियों में आने से सरकार हरकत में आई। ‘अमर उजाला’ ने जब बख्शो के घर के हालात बयां किए तो इस परिवार के लिए ठीक से दो जून की रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल था।
खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर बख्शो के परिवार को मिल रही सरकारी योजनाओं की सुविधा की पड़ताल के आदेश दिए। जिला लोक संपर्क विभाग ने रिपोर्ट कल्याण विभाग को सौंपी।
सो रहा विभाग, सीएम के कहने पर भी नहीं जागा
आदेशों के बाद विभाग ने जनवरी में विमला देवी को विधवा पेंशन लगवाने के लिए औपचारिकताएं पूरी कीं, लेकिन आठ माह बीतने के बावजूद सरकार से प्रतिमाह मिलने वाले 500 रुपये विमला को नसीब नहीं हो सके हैं।
ईसपुर की रहने वालीं विमला रिग पर काम करने की एवज में हर माह करीब 1300 रुपये कमाती हैं। इससे वह घर का खर्च चलाती हैं। दलील दी जा रही है कि विमला देवी की दावेदारी को ई-सॉफ्टवेयर प्रणाली तय करेगी।
चूंकि वह बीपीएल में नहीं, सॉफ्टवेयर बीपीएल को प्राथमिकता देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार ऐसे मामलों में कब तक ऐसे सॉफ्टवेयर का सहारा लेती रहेगी, जो समय पर जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाता। बख्शो की मां विमला देवी ने कहा कि वह गरीब है, पढ़ी लिखी भी नहीं।
दस साल पहले पति की मौत हो गई थी। इसके बाद वह पिता के झोपड़ीनुमा मकान में बच्चों के साथ रहने लगीं। किसी ने आज तक नहीं बताया कि विधवाओं को पेंशन भी मिलती है। अमर उजाला ने जनवरी में घासफूस का घर फिर भी बीपीएल में नहीं आता बख्शो का परिवार शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
ये है अधिकारियों की सफाई
जिला कल्याण अधिकारी असीम सूद ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन का काम ई-कल्याण सॉफ्टवेयर के आधार पर होता है। इसमें सभी मानकों को पूरा करने वाले आवेदकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में प्राथमिकता दी जाती है।
बख्शो देवी की माता विधवा अवश्य हैं, लेकिन उनका नाम बीपीएल सूची में नहीं है। इसलिए सॉफ्टवेयर में जो विधवाएं बीपीएल श्रेणी में आती हैं, उन्हें ऑटोमेटिकली प्राथमिकता मिलेगी। इसमें किसी अधिकारी के दखल से कोई काम नहीं किया जा सकता। उनकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। नंबर आते ही पेंशन शुरू हो जाएगी।