मुख्यमंत्री ने कहा कि किन्नौर जिला की रतन मंजरी महिला अधिकारों के लिए कई वर्षों से लड़ाई लड़ रही हैं, क्योंकि जनजातीय क्षेत्रों में कानून के तहत महिलाएं कई अधिकारों से वंचित हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में महिला अधिकारों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। कहा कि आज बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ा है, जो हमारे समाज की बदलती सोच को प्रतिबिंबित करता है।
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रविवार को शिमला में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि किन्नौर जिला की रतन मंजरी महिला अधिकारों के लिए कई वर्षों से लड़ाई लड़ रही हैं, क्योंकि जनजातीय क्षेत्रों में कानून के तहत महिलाएं कई अधिकारों से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं को भी समान अधिकार देने के पक्षधर हैं। सरकार इस दिशा में सहमति बनाने की कोशिश कर रही है और सहमति बनाने के बाद कानून को बदलने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद सचिवालय जाने की परंपरा को तोड़कर बालिका आश्रम गया। उन्होंने कहा कि सभी 6000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाने के लिए देश का पहला कानून बनाया। दूसरे बजट में विधवाओं के 23 हजार बच्चों की 27 वर्ष तक की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठाने का प्रावधान किया।