मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी विधायक सुनने को तैयार नहीं हैं। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के लिए छठे पे कमीशन की घोषणा की, लेकिन 10,000 करोड़ की देनदारियां छोड़कर गई और कर्मचारियों के लिए डीए की घोषणा की, लेकिन चुकाया नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दी है। कर्मचारियों के मामले में विपक्ष की स्थिति उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को 2017 से 2022 तक 8000 करोड़ से लेकर 11 हजार करोड़ रुपये तक की आरडीजी केंद्र सरकार से मिलती रही। वर्तमान सरकार को केवल 3500 करोड़ रुपये की आरडीजी मिली है।
'इतना बिल देखकर उन्हें भी हैरानी हुई तो जांच करने को कहा'
प्रदेश के कर्मचारियों के एनपीएस का 9000 करोड़ केंद्र के पास है। इसमें 4500 करोड़ राज्य सरकार का हिस्सा है, उस पर भी केंद्र सरकार कुंडी लगाकर बैठी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के विधायक पढ़कर नहीं आते हैं। हिमाचल इस समय आपदा के दौर में है और हिमाचल के कर्मचारी भी इस बात अवगत हैं, सरकार जल्द ही कर्मचारियों की देनदारियां चुकाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने और मंत्रियों के सरकारी आवास के बिजली बिल के मामले में कहा कि उनके 14 महीने का बिल 3 लाख और आएस बाली का 6 लाख रुपये का बिल आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतना बिल देखकर उन्हें भी हैरानी हुई तो जांच करने को कहा। अधिशासी अभियंता ने भी इतना बिल न होने की बात कही। अगर बिजली बिल की राशि अधिक दर्शाने के पीछे राजनैतिक कारण सामने आए तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड को बिल की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।