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Himachal: सीएम सुक्खू बोले- दुविधा में भाजपा, राजस्व घाटा अनुदान पर रुख स्पष्ट नहीं कर पाई

Fri, 13 Feb 2026 05:54 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को वापस लेने का प्रस्ताव राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे राज्य की आर्थिकी पर बुरा असर पड़ सकता है। 
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राजस्व घाटा अनुदान को लेकर सर्वदलीय बैठक। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के प्रदेश पर संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को वापस लेने का प्रस्ताव राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे राज्य की आर्थिकी पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बैठक को बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की और इस कदम को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय सिर्फ राजनीति कर रही है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न केवल कांग्रेस, बल्कि सीपीआईएम, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के अधिकारों के लिए खड़ी होने को तैयार नहीं है। भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में शामिल हुए और फिर बीच में ही छोड़कर चले गए।

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पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी के ताैर पर 54,000 करोड़ मिले: सीएम
 सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ मिले थे, जबकि मौजूदा राज्य सरकार को अब तक राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी और वित्तीय प्रबंधन के साथ प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का एक सांविधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था 1952 से चली आ रही है।

भाजपा का रुख प्रदेश हित में नहीं: सुक्खू
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों के लिए लड़ना अच्छी तरह से जानती है लेकिन भाजपा का रुख प्रदेश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता दुविधा में हैं और राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर लोगों के सामने अपना रुख साफ तौर पर रखने में नाकाम रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं को एहसास है कि केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान वापस लेना सही कदम नहीं है, लेकिन उनमें रुख स्पष्ट करने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कभी भी राज्य के लोगों के साथ खड़ी नहीं रही। 2023 की आपदा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन भाजपा सदस्यों ने सबसे पहले सदन से वाकआउट कर लिया। प्रदेश की जनता भाजपा के हिमाचल विरोधी रवैये को देख रही है और उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन लोगों के अधिकारों की रक्षा सबसे जरूरी है।

सिंघा बोले- यह वक्त सियासत का नहीं, हिमाचल के हक की लड़ाई
आरडीजी बंद होने के मुद्दे पर प्रदेश में जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच माकपा नेता राकेश सिंघा ने सभी दलों से एकजुट होकर लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक स्कोरिंग का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का है। सिंघा ने कहा कि आरडीजी की बहाली केवल किसी एक पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और सभी राजनीतिक दलों का साझा दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरडीजी पूरी तरह समाप्त हो गई तो इसे दोबारा बहाल कराना बेहद मुश्किल होगा। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा और विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल के साथ लगातार आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है। सिंघा ने उदाहरण देते हुए कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में हिमाचल को 7.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अब तक नहीं दी गई है। माकपा नेता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर सभी दलों को एक मंच पर आना चाहिए। सीपीआईएम ने सर्वदलीय बैठक से बीजेपी का बीच बैठक में छोड़ कर जाना दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे : बदलेव
16 वें वित आयोग में केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान बंद करने पर आम आदमी पार्टी ने नाराजगी जताई है। प्रदेश सचिव बलदेव राज ने कहा है कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रदेश को प्रतिवर्ष करोड़ों का नुकसान होगा। हिमाचल पिछले तीन वर्षों से हर साल प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रहा है जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। इस स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान देना बंद करना हिमाचल प्रदेश के साथ बहुत बड़ा धोखा है। आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि डॉ. राजेश चानना ने केंद्र से वित्तीय सहायता का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य के पास अपने सीमित संसाधन हैं। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए पार्टी प्रस्ताव भी पेश किया। बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि ने कहा कि राज्य को अपने हकों के लिए मिलकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 संकट का सामना करने के बाद, राज्य ने बीते तीन वर्षों में दो बड़ी आपदाओं का भी सामना किया है, जिससे उसके संसाधनों पर और दबाव पड़ा है।
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