मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपने गिरेबान में भी झांकें। उनके वक्त में सात मुख्य सचिव बदले गए। अफसरों के साथ तालमेल न होता तो वे दो दिन में आपदा राहत न दिला पाते। उन्होंने कहा कि अधिकारी कंधे से कंधा मिलाकर काम करने में लगे रहे। पुलिस अधिकारियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किए। जयराम को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी टीम भेजी है। केंद्र केे कुछ पैरामीटर हैं। उसी के अनुसार आपदा राहत मिलती है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री अमित शाह से बात हुई तो दिसंबर की किस्त को एडवांस कर दिया गया है। उन्होंने दिसंबर की राशि पहले दी है। बजट में कुछ कटौती कर आपदा पीड़ित लोगों को राहत देने की कोशिश की जा रही है। सीएम बोले कि उन्हें अभी आपदा प्रभावित परिवारों को संतुष्ट करना है। राहत मैनुअल को कई गुना किया गया है। जिनके मकान बह गए हैं। उनको भी राहत दी गई है।
कुमारसैन और चौपाल की सड़कों पर भी स्टाफ लगाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 8,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। केंद्र सरकार की एक टीम हाल ही में हिमाचल प्रदेश में हुई क्षति का जायजा लेने के लिए आई थी और उम्मीद है कि जल्द ही केंद्र सरकार किस्त जारी करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रतिवर्ष सभी राज्यों को जुलाई और दिसंबर माह में यह मदद मिलती है और हिमाचल प्रदेश को 180-180 करोड़ की दोनों किस्तें दे दी गई हैं, जबकि आपदा से उपजी विशेष परिस्थितियों से राहत के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की गई है।
विस्फोट के बाद एनएसजी की टीम आई, रिपोर्ट आएगी तो ही कुछ कह सकेंगे : सुक्खू
शिमला में बम धमाके के मामले में सुक्खू ने कहा कि एनएसजी की टीम आई है। जब भी ऐसा कोई विस्फोट होता है तो यह टीम देखती है कि इसमें कोई शरारती तत्व शामिल तो नहीं हैं। जब एनएसजी की टीम आती है तो सबूत इकट्ठा करती है। पर अभी तक ऐसा कुछ नहीं है। सरकार भी यह जानने का प्रयास कर रही है। जब रिपोर्ट आएगी, तभी कुछ कहा जा सकेगा।