अभियान के तहत आठ नगर निगमों, 29 नगर परिषदों तथा 39 नगर पंचायतों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलेंगे। विशेष रूप से नशे से सर्वाधिक प्रभावित 235 पंचायतों में गहन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक संपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने नशे की बढ़ती चुनौती पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशे की आदत युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। यह परिवारों और पूरे समाज को भी प्रभावित कर रही है। राज्य सरकार नशे के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। साथ ही रोकथाम, जागरूकता और पुनर्वास जैसे उपायों पर भी ध्यान दे रही है।
सुक्खू ने कहा कि खेल सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बन सकते हैं। इनसे युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित होता है। खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान युवाओं को जमीनी स्तर पर खेल गतिविधियों से जोड़ेगा।
यह उन्हें नशे से दूर रहने का सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा को स्वस्थ गतिविधियों की ओर मोड़ना है। सभी 3,758 ग्राम पंचायतों में युवाओं को जागरूक किया जाएगा। इस समिति में खेल संघों, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। सचिव युवा सेवाएं एवं खेल प्रियंका बसु इंग्टी, निदेशक शिवम प्रताप सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।