उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कृषि मंत्री चंद्र कुमार तथा उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से पेश वर्ष 2023-24 के बजट को ऐतिहासिक एवं आम लोगों का बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ग्रीन बजट पेश कर हिमाचल प्रदेश को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च 2026 तक राज्य को ग्रीन एनर्जी राज्य के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2023-24 में 500 मैगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि बजट में पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। साथ ही रोजगार व स्वरोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि बजट में प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए महत्वाकांक्षी प्रयास किए गए हैं। प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार एवं स्टार्ट अप सहायता प्रदान करने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना आरंभ करने की घोषणा की गई है। साथ ही सरकार ने नई औद्योगिक निवेश नीति लाने की घोषणा की है।
मार्क्सवादी क म्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव ओंकार शाद ने कहा कि प्रदेश के बजट से कामगारों और बागवानों को कोई राहत नहीं मिला है। बजट में किसानों और बागवानों की घोर उपेक्षा की गई है। माकपा नेता शाद ने कहा कि मजदूरों के साथ आर्थिक न्याय नहीं हुआ है। किसानों और बागवानों के लिए कोई बजट प्रावधान नहीं किया गया है। विभिन्न सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बजट में कुछ ठोस नहीं किया गया। सेब बागवानों के लिए मंडी मध्यस्थता योजना को तहत सब खरीद मूल्य नहीं बढ़ाया है।
भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि बजट में नया कुछ नहीं है। हिमकेयर, सहारा योजना तथा मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का बजट में जिक्र तक नहीं किया गया। जनता से झूठे वादे कर कांग्रेस ने सत्ता तो प्राप्त कर ली लेकिन जिन गारंटियों को लेकर कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है, उनको पूरा करने के लिए बजट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। यह पहला ऐसा बजट है जिसमें किसी भी श्रेणी को राहत नहीं दी गई है। गारंटियों को सत्ता में आने के वाद दरकिनार कर दिया गया। चुनावों से पूर्व गारंटियों का दम भरने वाली पार्टी पहले ही बजट में बेदम निकली। प्रत्येक वर्ष एक लाख रोजगार देने के वादा भी झूठा निकला। युवाओं सहित हर वर्ग इस बजट से बेहद निराश है।