मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
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सुक्खू सरकार के पहले बजट में कई नए सेस और कर शामिल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री पिछली जयराम सरकार पर कर्ज में डुबोने का आरोप लगा कड़े फैसले लेने की बात कर चुके हैं। वहीं, चुनावी साल न होने के कारण बजट के लोकलुभावन होने के आसार भी कम बने हुए हैं। संभावना जताई जा रही है कि सुक्खू सरकार हिमाचल प्रदेश में अपने पहले बजट में जहां शराब पर और सेस लगा सकती है, वहीं कई अन्य विलासिता की वस्तुओं पर भी नए टैक्स लगाए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री पहले ही चुके हैं कि हिमाचल प्रदेश में आर्थिक सुधारों के लिए कड़े फैसले लिए जाने की जरूरत है। उन्होंने यह बात उस समय कही थी, जब वह ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) के लिए बजट का प्रबंध डीजल पर वैट बढ़ाकर करने की बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनावी लाभ लेने के लिए सात प्रतिशत वैट कम किया।
वर्तमान सरकार ने इसी में तीन फीसदी बढ़ोतरी कर ओपीएस के लिए बजट जुटाया है। उन्होंने प्रदेश की जनता से भी इस बारे में सहयोग की अपील करते हुए कहा था कि आने वाले वक्त में इसी तरह के कड़े फैसले लेने होंगे। सरकार के कड़े फैसले बजट में आर्थिक नियोजन और प्रबंधन में सामने आ सकते हैं।
सभी विधायकों से पूछा, कैसे दें रोजगार और स्वरोजगार
हिमाचल प्रदेश के सभी कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय विधायकों से पूछा गया है कि वे बताएं कि राज्य में किस तरह से स्वरोजगार दिया जा सकता है या फिर रोजगार दिया जा सकता है। इसके लिए सभी विधायकों से एक नए प्रारूप पर अपने सुझाव लिखने को कहा गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बनाए जा रहे वार्षिक बजट अनुमानों के लिए विधायकों से पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है।
पहला बिंदु यह है कि हिमाचल प्रदेश में फिजूलखर्ची घटाने के लिए के लिए किन उपायों को किया जाए। दूसरा सुझाव यह पूछा गया है कि राज्य में वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए क्या किया जाए। तीसरा सुझाव यह मांगा गया है कि बेहतर प्रशासन के लिए किस तरह के उपायों को अपनाने की जरूरत है।
चौथा सुझाव स्वरोजगार और रोजगार सृजित करने के लिए मांगा गया है। किसी भी विकास क्षेत्र में नई नीति के लिए भी सुझाव मांगा गया है। सभी विधायकों को सुझाव 1 और 2 फरवरी को होने जा रही विधायक प्राथमिकता बैठकों से पहले देने को कहा गया है, जिससे कि इन्हें अगले बजट अनुमानों में शामिल किया जा सके।