मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 31 मई तक लगभग 1,004 करोड़ का उल्लेखनीय कर संग्रहण किया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सरकार ने निरंतर निगरानी, टैक्स रिटर्न की शीघ्र जांच, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ऑडिट को समय पर पूरा करने और कर अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया है। सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान 13 लाख ई-वे बिलों के सत्यापन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अंतर्गत सरकार की ओर से 1.85 लाख ई-वे बिल सत्यापित किए गए और इस वित्त वर्ष के पहले दो माह में उल्लंघनकर्ताओं से जुर्माने के रूप में 92 लाख रुपये वसूल किए हैं। प्रभावी जीएसटी प्रणाली एवं किए जा रहे प्रयासों के माध्यम से राज्य सरकार ने न केवल कर राजस्व में वृद्धि दर्ज की है, बल्कि करदाताओं के बीच अनुपालना की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ईको टूरिज्म गतिविधियों को प्रोत्साहित कर राज्य की आय बढ़ाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में काम कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में 72 वन विश्राम गृहों और 22 ईको पार्कों में ईको पर्यटन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने 93 प्रस्तावित स्थलों पर ईको टूरिज्म गतिविधियों के संचालन के लिए वृहद योजना (मास्टर प्लान) में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने वन विभाग की बैठक की समीक्षा की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और इससे राज्य को काफी फायदा हो सकता है। वन विभाग को इसका अधिक से अधिक लाभ उठाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईको-टूरिज्म की संभावनाओं के दृष्टिगत एक वृहद योजना तैयार की जा रही है।
इसमें संभावित रूप से बुनियादी ढांचा विकसित करना, आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, प्राकृतिक स्थलों को संरक्षित करना और स्थानीय समुदायों की सहभागिता को सुनिश्चित करना है। प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, विधायक देवेंद्र भुट्टो, चैतन्य शर्मा, आशीष शर्मा, हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, प्रधान सचिव वन ओंकार चन्द शर्मा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।