सूत्रों की मानें तो इस वरिष्ठ पदाधिकारी की पार्टी के पूर्व संगठन महामंत्री रामलाल से भी शिकायत की गई थी। जिसके बाद रामलाल ने सख्त निर्देश दिए और उसके बाद विरोधी गुट की गुटबाजी की धार कुछ कुंद हो गई। लेकिन रामलाल के हटने के साथ ही यह गुट फिर सक्रिय हो गया है जिसकी वजह से पार्टी के अंदर की गुटबाजी प्रदेश की सत्ता के गलियारों तक पहुंच रही है। हाल यह है कि धवाला को अपनी बात कहने के लिए संगठन के बजाय मुख्यमंत्री के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जाहिर है संगठन के अंदर से शुरू हुए इस सियासी घमासान का असर विधानसभा उपचुनाव पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस की राह पर भाजपा
भाजपा के ताजा हालत देखकर तो यही लग रहा है कि वह भी कांग्रेस की ही राह पर चल पड़ी है। प्रदेश के पदाधिकारी गुटबाजी को खत्म करने के बजाय उसे हवा दे रहे हैं। सबसे बड़े जिले कांगड़ा में हाल ही में नजरंदाज किए जाने के बाद इंदु गोस्वामी ने प्रदेश महिला भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। धवाला मामला भी मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गया है। वहीं, सिरमौर, शिमला में भी गुटों में बंटी भाजपा के नेता एक-दूसरे को धीरे धीरे नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। जाहिर है, मंत्रिमंडल के विस्तार के नजदीक आने के साथ ही यह गुटबाजी बढ़ती जा रही है।