नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद से बड़े पैमाने पर तबादलों का क्रम जारी है। मुख्य सचिव पद पर विनीत चौधरी को बैठाने के बाद शुरू हुआ सिलसिला थम नहीं रहा है। पुलिस महानिदेशक बदले गए। 23 दिन में सरकार ने 149 आईएएस और एचएएस अफसरों को इधर से उधर किया है।
एक दिन में 104 आईएएस और एचएएस बदले गए। इतने बड़े तबादला आदेश में जमकर राजनीतिक सिफारिशें चलने के आरोप भी लग रहे हैं। राजनीतिक दखल की वजह से कई अधिकारियों के तबादले निरस्त कर उन्हें मनचाहे स्टेशन देने के लिए तबादला सूची में संशोधन हुआ।
नौकरशाही के साथ सरकार ने सचिवालय सामान्य प्रशासन में भी 70 कर्मचारियों की ब्रांच बदल दी है। मुख्यमंत्री ब्रांच में भी पूरा नया स्टाफ तैनात किया गया है। लोक निर्माण विभाग, आईपीएच, स्वास्थ्य महकमे में भी अब तक 80 अफसरों और कर्मचारियों के तबादले कर दिए हैं।
इसके अलावा 100 अधिकारी और कर्मचारी इधर-उधर किए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में अभी तक 100 से अधिक डीओ नोट पेंडिंग चल रहे हैं। जिलों के अफसर भी कामकाज छोड़कर सचिवालय में डेरा डाले हुए हैं।
प्रदेश भाजपा में अब निगम और बोर्डों के उपाध्यक्ष पदों को लेकर नेताओं में खींचतान से तैनातियां लटक गई हैं। एक सप्ताह से कई पदों पर तैनाती के लिए भाजपा नेताओं में प्रतिस्पर्धा चल रही है।
मुख्यमंत्री जयराम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नड्डा, धूमल, शांता के करीबी नेताओं में से किसकी ताजपोशी की जाए। राजनीतिक तैनातियों पर संघ की भी नजर है। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनाती प्रस्ताव लटक गए हैं।
सरकार जल्द सहकारी बैंक, कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक, 20 सूत्रीय कार्यक्रम, ओबीसी कल्याण बोर्ड, पर्यटन, परिवहन आदि में उपाध्यक्ष तैनात करने जा रही है। अभी केवल उद्योग विभाग में एक निगम और एक बोर्ड में राजनीतिक तैनाती हुई है। बड़े ओहदों के लिए बड़े नामों के बीच प्रतिस्पर्धा है।
जयराम सरकार में मंत्रिमंडल से बाहर रखे गए पूर्व मंत्री रमेश धवाला और नरेंद्र बरागटा रेस में सबसे आगे हैं। दोनों नेता 20 सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष के लिए दावेदार माने जा रहे हैं। मंत्रिमंडल से बाहर रहने के बाद दोनों ही नेता अपना विरोध केंद्रीय नेतृत्व को जता चुके हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती भी बड़ा ओहदा चाहते हैं।
उनकी ताजपोशी को लेकर संगठन की ओर से भी सरकार पर दबाव है। नैनादेवी हलके से चुनाव हारे रणधीर शर्मा को सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष का दावेदार बताया जा रहा है। दो दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष सत्ती और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा ने राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर एक बैठक भी की है।
संगठन जयराम सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बता रहा है। मुख्यमंत्री जयराम दो दिन के दिल्ली प्रवास से लौट आए हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न खेमों के बीच तालमेल बैठाने की है।