पेयजल सप्लाई को लेकर दिनभर चली कसरत से संतुष्ट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि सरकार राजधानी समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में पेयजल संकट को लेकर बेहद गंभीर है।
राजधानी शिमला के लिए पेयजल सप्लाई को सुचारु बनाने के लिए कई विकल्प तलाशे लिए हैं। गुम्मा स्कीम की तीन कूहलों की सप्लाई के लिए वहां के बाशिदों से बातचीत कर उन्हें पेयजल सप्लाई में पानी देने को मना लिया गया है।
संचाई नहीं होने से फसलों के नुकसान की भरपाई राज्य सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि एक बड़ी राहत गिरी नदी में मिले नए सोर्स से मिली है। सोर्स का पानी बोरबेल टेस्टेड है। निगम तुरंत उसकी सप्लाई लोगों को कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अश्वनी खड्ड शिमला पेयजल सप्लाई का बड़ा सोर्स था, लेकिन कुछ वर्ष पहले उसके पानी से क्षेत्र में पीलिया फैला। अब सरकार खड्ड के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद वहां से पानी ले सकती है।
सरकार ने पुणे की एक लैब को खड्ड के पानी के सैंपल भेज दिए हैं। लैब से तुरंत सैंपल रिपोर्ट भेजने का आग्रह भी किया है। प्रदेश के कई जिलों में पेयजल संकट के बाद मुख्यमंत्री ने संवेदनशील पांच जिलों के जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किये।
जिलाधिकारियों का एक व्हट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसपर पेयजल सप्लाई को बनाई व्यवस्था को सीएम खुद मानिटर करते रहे। इससे पहले मुख्यमंत्री ने हर जिलाधिकारी को सख्त लहजे में साफ कर दिया कि
पेयजल संकट पर उनकी जवाबदेही सुनिश्चित होगी। शाम तक अधिकांश जिलाधिकारियों ने पेयजल सप्लाई मुख्यमंत्री को बनाई व्यवस्था से अवगत करवा दिया।