विपक्ष की ओर से कहा गया कि बजट चर्चा में उठाए वित्तीय प्रबंधन, रोजगार सृजन जैसे मसलों पर स्थिति साफ करने के बजाय मुख्यमंत्री बिना तथ्यों के आरोप लगा रहे हैं। काफी समय तक नोकझोंक के बाद विपक्ष ने वाकआउट किया।
पिछले चार दिनों के दौरान करीब 16 घंटे 49 मिनट तक चली बजट चर्चा के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चर्चा में उठे मुद्दों पर जवाब दिया। अपने जवाब के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेसी विधायकों पर उनकी सरकार पर फिजूलखर्ची करने के आरोपों पर पलटवार किया।
कहा कि उनकी सरकार ने अपने दो महीने के कार्यकाल में जो भी कर्ज लिया, उसमें 1038 करोड़ तो कांग्रेस की पूर्व सरकार की ओर से लिए लोन का ब्याज चुकाने में ही खर्च कर दिया।
सरकार के लिए तो सिर्फ 86 करोड़ रुपये ही लिए। उन्होंने कांग्रेसी विधायकों पर पलटवार करते हुए कहा कि आपकी सरकार ने तो सरकारी खजाने का उपयोग पार्टी की रैलियों के लिए किया।
मंडी की राहुल गांधी की रैली पर चुटकी लेते हुए कहा कि वैसे तो रैली में ज्यादा लोग नहीं आए, लेकिन जितने आए उन्हें लाने और ले जाने के लिए एचआरटीसी की बसों का इस्तेमाल किया गया। यही नहीं, इसके लिए सरकारी खजाने से 75 लाख रुपये भी खर्च कर दिए गए।
सीएम के इतना कहते ही कांग्रेसी विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने विधायकों को शांत होने और जवाब सुनने को कहा, लेकिन इसके बाद कांग्रेस विधायक हंगामा करते हुए वाकआउट कर गए।
जयराम के सरकारी पैसे के दुरुपयोग के आरोप के बाद मुकेश अग्निहोत्री ने भी पलटवार किया। बोले, प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की रैली के लिए सरकारी तंत्र और सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि भाजपा विधायकों ने जब एक भी रुपये के खर्च का सुबूत देने को कहा तो कांग्रेसी विधायक चुप हो गए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए।
पिछली कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों के साथ भत्ता देने के नाम पर सिर्फ धोखा किया है। उन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल में सिर्फ दस करोड़ रुपये भत्ते के लिए दिए, जबकि हमारी सरकार ने इस साल के ही बजट में बेरोजगारी भत्ते के लिए चालीस करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया है।
यह बात बजट चर्चा पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में कही। चर्चा के दौरान विपक्ष के बेरोजगारी भत्ता खत्म करने के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने 2012 में अपने घोषणा पत्र में प्रदेश के सभी बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही थी, लेकिन जब देने की बारी आई तो सिर्फ दस करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया।
आज बेरोजगारी भत्ते के हिमायती बनने वालों की ही सरकार के एक मंत्री को युवाओं को भत्ता दिलवाने के लिए पदयात्रा तक निकालनी पड़ी थी। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह और बात है कि उनकी यात्रा की दिशा भटक गई और वह कहीं और ही चले गए।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री पर तंज कसते हुए सीएम ने कहा कि आप उद्योग मंत्री रहे हैं, लेकिन लगता है आपने श्रम एवं रोजगार विभाग के 2018-19 के बजट प्रावधान को नहीं देखा।
बेरोजगारी भत्ते की योजना को हमारी सरकार ने जारी रखा है और उसके लिए इस वर्ष के 10 करोड़ रुपये के बेरोजगारी भत्ते के व्यय को देखते हुए अगले वर्ष 40 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया है।