जब वह मनाली आते थे तो उनसे विधायक के रूप में मिलना होता था। मनाली के माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट में एक बार आधा घंटा विधायकों की बैठक में बात करते-करते उन्होंने दो घंटे का वक्त ले लिया था। वह विधायकों को बारीकी से छोटी-छोटी बातें समझाते रहे।
सीएम जयराम बोले - अपने प्रवास के बाद अटल जी मनाली से वापस जा रहे थे। वहां कुछ कुर्सियां लगी थीं। उनका कारकेड जाने वाला था। मुझे परिवार के साथ फोटो खींचना था। वहां परिस्थिति ऐसी बनी कि अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली।
संयोग से उनके एक निजी सहायक फतेह सिंह मेरे निर्वाचन क्षेत्र से थे तो उन्होंने उनके कान के पीछे कहा - ये मेरे विधायक हैं आपके साथ फोटो खींचना चाहते हैं? वह कुर्सी पर बैठे, हमारा इंतजार किया।
उन्होंने मेरे साथ और मेरे पत्नी-बच्चों के साथ फोटो खींचा। यह फोटो मैंने आज भी संभालकर रखा है। अटल जी हर बात को गंभीरता से लेते थे। अटल बिहारी वाजपेयी हिमाचल को अपना घर मानते थे।
वह विपक्ष के नेता के रूप में और जब प्रधानमंत्री थे तो भी सात दिन का उन्होंने मनाली में प्रवास किया। वह अपने गांव प्रीणी में रहे। यहां आकर लोगों से सहजता से मिलना, कविताएं सुनाना आदि उनसे जुड़ी कई बातें हैं। इन्हें हिमाचल भुला नहीं सकता।