उन्होंने कहा कि बेरोजगार लोगों को रोजगार देने के लिए कोऑपरेटिव सबसे ज्यादा कार्य कर सकता है। चक्कर मिल्क प्लांट का शुभारंभ 1971 में इंडो जर्मन की ओर से किया गया था और प्रोजेक्ट की क्षमता 10,000 लीटर थी।
वर्ष 1998 में यह क्षमता 20,000 लीटर कर दी गई। लेकिन अब 33 करोड़ की मदद से ऑटोमेटिक प्लांट यहां पर लगाया जाएगा और इसकी क्षमता 40,000 लीटर से अधिक कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव सेक्टर को हमने अपने पहले ही बजट में भारी सब्सिडी दी है। इसके बावजूद भी लोग कोऑपरेटिव सेक्टर से क्यों नहीं जुड़ रहे हैं, यह चिंता का विषय है।
बल्ह पहुंचने पर सीएम ने विरोधियों को चेताते हुए कहा ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसलिए मैं चाहता हूं कि यह बल्ह में बने। इसमें विपक्ष कई बाधाएं डाल रहा है।’ उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पूरा होकर रहेगा। इसके लिए चाहे इसे बल्ह के बजाय किसी और जगह ही क्यों नहीं बनाना पड़े।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी का सहयोग जरूरी है। एयरपोर्ट का सर्वे हो चुका है। हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार से भी इसके लिए पूरा सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने बल्ह क्षेत्र के लोगों से एक बार फिर से सहयोग की अपील करते हुए इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसमें विस्थापन होगा जो बहुत ही बड़ा बलिदान होता है।
लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ न कुछ खोना पड़ता है। इस मौके पर उन्होंने विपक्ष पर भी जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस प्रकार से बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उसी प्रकार से मुद्दों से खेल रहे हैं। हर दो दिन के बाद सरकार को घेरने का नया मुद्दा ढूंढते रहते हैं।