जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के एक-तिहाई मामले पड़ोसी राज्यों के लोगों पर दर्ज होते हैं, जो चिंता का कारण है। उन्होंने कहा कि पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और चंडीगढ़ के साथ मिलकर नशे के खात्मे के लिए रणनीति बनाई गई है। भांग की खेती को वैध बनाने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इसका उपयोग ज्यादातर दवाई में होता है।
दूसरा जुलाई 2018 में उत्तराखंड में कुछ किसानों को लाइसेंस दिए गए हैं जो भांग के रेशाें से धागे बनाएंगे। यहां भांग की खेती कामर्शियल तरीके से होगी। भांग की खेती पर प्रतिबंध से हिमाचल के ऊंचे इलाकों के किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। इससे अवैध नशे के कारोबार पर भी रोक लगेगी। कुल्लू, शिमला, मंडी, सिरमौर और सोलन के अलावा कई जिलों में अवैध तरीके से भांग की खेती की जाती है।