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सीवरेज सिस्टम से जुड़ेगा पूरा हिमाचल: सीएम जयराम

Fri, 31 Aug 2018 12:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल का हर गांव और शहर सीवरेज सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार एक मास्टर प्लान तैयार करेगी। इसके बाद इस मास्टर प्लान को स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह जानकारी वीरवार को प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सीवरेज आम आदमी की समस्या है। अगर समय रहते इसका समाधान नहीं निकाला गया तो यह समस्या और भी गंभीर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों और नगर पंचायतों में लोगों को सीवरेज सुविधा से न जुड़ने का कारण शहरी विकास विभाग और सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य (आईपीएच) विभाग में आपसी तालमेल न होना है।

यह सोचने वाला विषय है कि दो दशकों से चल रहे काम के बावजूद हिमाचल के कई शहर सीवरेज सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि जिस गति से निकायों को सीवरेज से जोड़ने का काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है। अगर दोनों विभागों में तालमेल होता तो यह काम बहुत पहले ही पूरा हो गया होता।
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सीएम ने कहा कि सदन में यह प्रश्न करीब 20 मिनट से चल रहा है। सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की बात रख रहे हैं। सीवरेज को लेकर सभी विधायकों की चिंता वाजिब है। उन्होंने कहा कि यह भी एक विचित्र स्थिति है कि सीवरेज सुविधा के लिए पैसा शहरी विकास विभाग देता है और काम सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को करना होता है।

मुख्यमंत्री बोले, सरकार के पास अभी विचाराधीन है यह मामला

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि उनके पास विधायकों की ओर से उन्हें डीसी और एसपी की तर्ज पर झंडियां देने की बात आई है। मगर यह मामला अभी विचाराधीन है। सीएम जयराम ठाकुर ने यह बात वीरवार को मीडिया से बातचीत के दौरान की।

हिमाचल प्रदेश के विधायक बत्ती हटने के बाद डीसी और एसपी की तर्ज पर झंडी मांग रहे हैं, जिसमें एमएलए लिखा हो। इससे वे भीड़भाड़ वाले इलाकों और अन्य क्षेत्रों में बगैर किसी गतिरोध के जा पाएंगे।

इस विचार के साथ एक प्रस्ताव भाजपा और कांग्रेस विधायकों की ओर से राज्य विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल को दिया है। सीएम ने भी स्पीकर से इस मुद्दे पर चर्चा की है। इस प्रस्ताव को आगे विधायक सुविधा समिति को भेजा जा सकता है।

इसके बाद विधायकों के लिए नया नियम बनाया जा सकता है कि नहीं। हालांकि, यह मामला अभी विचाराधीन है। विधायक इस तरह की मांग पिछले बजट सत्र में भी उठा चुके हैं, मगर सिरे नहीं चढ़ी।
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इस सरकार में अवैध खनन के न एजेंट हैं, न कोई मिला हुआ : बिक्रम

सूबे में हो रहे अवैध खनन का मामले में उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि इस सरकार में न तो अवैध खनन के एजेंट हैं और न ही उनके साथ कोई मिला हुआ है। कहा कि सरकार अवैध खनन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसी के तहत बीते आठ महीनों में अवैध खनन को लेकर चार एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। साथ ही जुर्माना बढ़ाने से लेकर सीसीटीवी तक लगवा रही है।

इसके बाद भी सभी विधायकों से अपील की कि वह अपने क्षेत्र में होने वाली किसी भी अवैध खनन की गतिविधि की सूचना देंगे तो उसपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, यह भी कहा कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी खनन माफिया से मिला हुआ मिला तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे।वीरवार को विधानसभा में गैर सरकारी सदस्य दिवस पर भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने अवैध खनन के मुद्दे पर संकल्प पेश किया।

पठानिया ने प्रदेश में केवल वैज्ञानिक खनन की पैरवी की और राज्य में खनन के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कांगड़ा जिला के चक्की खड्ड में हो रहे अवैध खनन का मामला भी उठाया। पठानिया ने अवैध खनन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों तथा पुलिस की मिलीभगत का भी आरोप लगाया। चर्चा के दौरान रामलाल ठाकुर, चौधरी सुखराम, जगत सिंह नेगी, परमजीत सिंह पम्मी, हर्षवर्धन चौहान, जेआर कटवाल, मोहन लाल ब्राक्टा, रविंद्र धीमान, लखविंद्र राणा और सतपाल सिंह रायजादा ने भी हिस्सा लिया।

चर्चा के जवाब में उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को राज्य में 120 स्टोन क्रशर से 80 करोड़ रुपए की रिकवरी करनी है लेकिन इनमें से कई लोग न्यायालय चले गए हैं जिस कारण ये पैसा लंबित है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने गलतियां की हैं उनसे सारे का सारा पैसा वसूला जाएगा। ठाकुर ने कांगड़ा जिला की चक्की खड्ड में अवैध खनन रोकने के लिए उद्योग निदेशालय से विशेष दस्ता तैनात करने और पूरे  क्षेत्र को खनन माफिया से खाली कराने की भी घोषणा की।

मंत्री ने कहा कि कोलडैम के निर्माण में ऐसी छह फर्मों ने मिट्टी ढोने का काम किया जो पंजीकृत नहीं थी। प्रदेश सरकार ने उनपर करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया है। उन्होंने ये भी कहा कि किन्नौर में खनन के लिए सात साइट चिह्नित की गई है लेकिन पंचायतों से एनओसी न मिलने के कारण इन्हें अभी तक नीलाम नहीं किया जा सका है।

इसके अलावा हमीरपुर में 14, कांगड़ा में 30, मंडी में 28, सिरमौर में 24, ऊना में सात, बिलासपुर में चार और कुल्लू में दस खनन साइट चिह्नित की गई है जिनकी नीलामी से प्रदेश सरकार को 49 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। उन्होंने एम फार्म का दुरुपयोग रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही।
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