कैबिनेट में सियासी उठापटक का असर मुख्यमंत्री के कांगड़ा दौरे में साफ दिखा। लॉकडाउन के चार माह बाद कांगड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पहली बार कांगड़ा के नेताओं को एकता के सूत्र में पिरोते दिखे। खास नजर तीन नेताओं किशन कपूर, रमेश धवाला और सरवीण चौधरी पर रही। लॉकडाउन के बीच तीनों नेता कई बार सीएम के समक्ष सियासी विरोध के स्वर तीखे करते दिखे थे।
अकसर मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से दूर रहने वाले सांसद किशन कपूर लंबे अरसे बाद जयराम ठाकुर की अगवानी करते दिखे। पवन राणा से सीधी जंग लड़ने वाले और कैबिनेट रैंक न मिलने से नाराज रहने वाले रमेश धवाला भी मुख्यमंत्री के अंग-संग रहे। हाल में एक ट्रांसफर के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से कथित रूप से भिड़ने वालीं सरवीण चौधरी शहरी विकास विभाग हाथ से जाने के बाद सीएम की अगवानी कर रही थीं।
ढाई साल तक इंतजार के बाद मंत्री पद पाने वाले राकेश पठानिया जिले की अगुवाई को शक्ति प्रदर्शन से प्रदर्शित कर रहे थे। इससे इतर मंत्री पद जाने से नाराज चल रहे विपिन परमार राकेश पठानिया के साथ खड़े होकर सियासी तूफान को थमा हुआ जता रहे थे। प्रदेशाध्यक्ष चुनाव के दौरान हाई प्रोफाइल सियासी लॉबिंग का शिकार हुईं इंदु गोस्वामी भी पर्दे के पीछे की नई सियासी खिलाड़ी बनकर उभर रही थीं।
पहली बार मंत्री बने राकेश पठानिया और नए विधायक मुख्यमंत्री को स्नेह का लेप लगाने की कोशिश में लगे रहे। उधर, कैबिनेट में बड़े फेरबदल के बाद बिक्रम ठाकुर भी मुख्यमंत्री दौरे में शामिल हुए। चंबा के विधायक भी दौरे में शामिल हुए। सीएम के दौरे में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने से कोई भी नहीं चूका।
नए क्लेवर में नजर आए मुख्यमंत्री
निचले हिमाचल के कथित रोष की ज्वाला को शांत करने के लिए कांगड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नए क्लेवर में नजर आए। ऐसा पहली बार हुआ कि समीक्षा बैठक में मंत्री-विधायकों और अफसरों को आमने-सामने बैठाकर उनकी घोषणाओं के कार्यान्वय का हिसाब-किताब मांगा गया। मुख्यमंत्री ने रात को विधायकों और मंत्रियों को डिनर देकर कूटनीति की बिसात बिछाई।