सरकार का मतलब यह नहीं होता कि बिना सोचे समझे कोई भी घोषणा कर दो। बिना योजना शिलान्यासों और उद्घाटनों के फट्टे लगाने से विकास नहीं होता। मुख्यमंत्री के संकेतों से साफ है कि धर्मशाला दूसरी राजधानी के दर्जे से आगे नहीं सरकेगी। जयराम सरकार फिलहाल परंपराओं की दुहाई देकर शीतकालीन प्रवास तक ही इसे सीमित रखना चाह रही है।
दरअसल, दूसरी राजधानी का तकनीकी अर्थ यह है कि शिमला की तरह दूसरी राजधानी का संरचनात्मक ढांचा धर्मशाला में भी बसे। शिमला की तरह धर्मशाला में भी सभी निदेशालय और दफ्तर होने चाहिए जिससे दूसरी राजधानी में पूरी तरह सरकार चलाई जा सके।
सरकार को धर्मशाला में शिमला की तरह पूरा संरचनात्मक ढांचा विकसित करने में अरबों रुपये खर्च हो जाएंगे। इसलिए, दूसरी राजधानी का सिर्फ दर्जा देकर जयराम सरकार जनता को शिगूफे में नहीं रखना चाहिए।