योजना विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते सीएम जयराम ठाकुर।
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विधायक प्राथमिकता योजनाओं की डीपीआर तैयार करने में देरी पर सीएम जयराम ठाकुर ने तल्खी दिखाई। कहा कि विधायक प्राथमिकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि वे निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और उन्हें संबंधित क्षेत्रों की विकासात्मक आवश्यकताओं और जन आकांक्षाओं की बेहतर जानकारी होती है। सीएम बुधवार को शिमला में योजना विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधायक प्राथमिकताओं में अकसर देरी हो जाती है, क्योंकि संबंधित विभागों की ओर से समय पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार नहीं की जाती है।
विधायकों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को अंतिम रूप देते वक्त विश्वास में लिया जाना चाहिए। इसे तैयार करने में देरी के कारणों के बारे में भी उन्हें अवगत करवाया जाना चाहिए, जिससे इस दिशा में उचित कदम उठाए जा सके। विधायकों की सक्रिय भागीदारी तय कर योजना के बारे में जिला स्तर पर नियमित बैठकें होनी चाहिए। मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, योजना सलाहकार डा. वासु सूद और सचिव प्रशासनिक सुधार संदीप भटनागर ने भी विचार रखे।
लीक से हटकर सोचें डीसी, जिले में कम से कम एक योजना तैयार करें
मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे लीक से हटकर सोचें। अपने जिले में कम से कम एक विशेष योजना शुरू करें। कोरोना ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है, जिसके लिए कोई तैयारी नहीं थी। उपायुक्तों को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बजट में शामिल करने के लिए भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने चाहिए। विकासात्मक परियोजनाओं के निष्पादन में देरी की जांच के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पीडब्ल्यूडी की 500 करोड़ रुपये की 114 परियोजनाएं मंजूर कीं
जयराम ने कहा कि आरआईडीएफ-एक्सएक्सवीआई के तहत लोक निर्माण विभाग में 500 करोड़ की 114 परियोजनाएं मंजूर की गई है। जल शक्ति विभाग में 300 करोड़ की 137 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इन्हें पूरा करने की अवधि 2020-21 से 2023-24 तक है। कहा कि नाबार्ड के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को निर्धारित समय पर तैयार करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।