जयराम ने कहा कि पड़ोसी राज्य होने के नाते हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भौगोलिक और जलवायु संबंधित समानताएं हैं और दोनों राज्यों के लोग परिश्रमी और विनम्र हैं।
कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और देश के अन्य भागों में रहने वाले लोगों की भावनाओं से परिचित करवाने में सहायक हैं।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने शिमला शहर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान कश्मीरी छात्रों ने एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया और प्रदेश के दौरे से जुड़े अपने अनुभव सांझा किए।
मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. साधना ठाकुर, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर, प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत, समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार भी स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत प्रदेश के छात्रों को कश्मीर भेजने पर विचार करेगी। राज्य की साक्षरता दर केरल के बाद भारत में दूसरे स्थान पर है। सरकार प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर बल दे रही है।