मुख्यमंत्री ने लीकेज के कारण पानी की बर्बादी को रोकने तथा निर्माण कार्यों में प्रयोग किए जा रहे पानी के कनेक्शनों को काटने के निर्देश दिए। उपभोक्ताओं से भी पानी का न्यायसंगत उपयोग करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पानी की स्थिति की निगरानी तथा लोगों में पानी के वितरण की देखरेख करने के निर्देश दिए।
टैंकर सप्लाई का होगा रोस्टर- शिमला शहर में पानी की आपूर्ति के लिए 17 जल टैंकर , 15 यूटिलिटी तथा चार टिप्परों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अलावा सिरमौर और बिलासपुर से तीन तीन टैंकर मंगवाए हैं। टेंकरों के माध्यम से जल के समान वितरण के लिए विश्वसनीय तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए। टेंकर सप्लाई का व्यापक प्रचार कर क्षेत्र विशेष के लोग इन टेंकरों के संबंध में सूचना करवाई जाएगी।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास, शिमला के उपायुक्त, विशेष सचिव राजस्व, नगर निगम आयुक्त शिमला, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंता समिति के सदस्य होंगे। सचिव आईपीएच देवेश कुमार समिति के सदस्य सचिव एवं संयोजक नियुक्त किए गए हैं।
राजधानी शिमला समेत समूचे प्रदेश में जबरदस्त जल संकट का असर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर पड़ना शुरू हो गया है। जल संकट के बीच शासन प्रशासन ने जहां पानी के लिए टैंकर से सप्लाई शुरू की है, वहीं पानी चोरी से लेकर पानी भरने को लेकर मारपीट और धक्कामुक्की की घटनाओं से पुलिस की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई हैं।
रविवार देर रात मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे लोगों के हुजूम के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिए हैं कि पानी वितरण की प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था को लेकर खास एहतियात बरते जाएं। वितरण के समय पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात करने को कहा गया है।
नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीआईडी ने भी सभी जिलों के एसपी व सरकार को इनपुट भेजा है कि अगर पानी के संकट से समय से न निपटा गया तो हालात खराब हो सकते हैं। सीआईडी के इनपुट के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कसरत शुरू कर दी है।