बागवानी पर मौसम की गलत मार पड़ रही है। स्टोन फ्रूट प्लम में भी वक्त से पहले पत्ते तथा फूल आने शुरू हो गए हैं। ऐसा कम बारिश होने, बर्फ के नहीं गिरने और मौसम में गरमाहट आने के कारण हो रहा है। सेब, नाशपाती में भी जल्दी पत्तियां फूटने लग गई हैं। मौसम का ये बिगड़ा मिजाज बागवानी फसलों को प्रभावित कर सकता है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, सिरमौर, शिमला जिलों के कई इलाकों में प्लम में समय पूर्व फूल आ रहे हैं और फलों की सेटिंग भी हो रही है। मौसम में आए बदलाव से ये संकेत अच्छे नहीं हैं। इससे फलों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकती है। कोटखाई के बखोल क्षेत्र के प्रगतिशील और मशहूर बागवान संजीव चौहान का कहना है कि इस बार न तो ठीक से बर्फबारी हुई है और न बारिशें ही हो रही हैं।
मौसम के बदले तेवरों का बागवानी पर भी बुरा असर पड़ा है। स्टोन फ्रूट प्लम की ब्लैक एंबर किस्म की फ्लॉवरिंग जो दस से पंद्रह दिन के बाद होनी थी, वो शुरू हो चुकी है। 15 से 20 मार्च के बाद फ्लॉवरिंग होती थी, मगर ये पहले हो रही है। समुद्र तट से 6800 फुट ऊंचाई पर भी प्लम में 25 फरवरी के बाद फूल आना शुरू हो गया है। इस समय पूर्व फ्लॉवरिंग से नुकसान होने की आशंका ज्यादा है।
प्लम में वक्त से पहले फूलों का आना सही नहीं
भारतीय कृषि अनुसंधान क्षेत्रीय केंद्र शिमला के अध्यक्ष डा. कल्लोल कुमार प्रामाणिक ने कहा है कि प्लम में वक्त से पहले फूलों का आना सही नहीं है। इससे फलों की सेटिंग प्रभावित हो सकती है।
प्लम की तरह ही सेब की फसल पर भी इसका गलत असर देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में दूसरे फलों के पौधों पर भी यही स्थिति हो सकती है। ये जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक असर है।
इसके कारण हारमोन केमिकल न्यूट्रियेंट्स को इस्तेमाल किया जा सकता है। आईबीए इंडोल ड्यूटरिक एसिड, बोरिक एसिड, प्लेनोफिक्स, जिंक सल्फेट और प्रोमोलिन जैसे रसायन इसके लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।