पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू पहले से राठौर के स्वागत को खड़े थे। राठौर के मंच पर पहुंचने के बाद पाटिल और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह भी आ गए। इसी बीच, वीरभद्र समर्थकों ने उनके जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।
दूसरी ओर से सुक्खू समर्थकों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के बीच गालीगलौज शुरू हो गया। टकराव बढ़ने के साथ ही दोनोें गुटों के समर्थकों में मंच के सामने ही हाथापाई शुरू हो गई। लात-घूंसों के साथ प्लास्टिक की कुर्सियां एक-दूसरे पर फेंकी जाने लगीं।
इसमें कई कार्यकर्ताओं को चोटें आईं। गंभीर चोट लगने के कारण सुक्खू समर्थक राजीव राणा को शिमला के डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह सारा घटनाक्रम प्रभारी रजनी पाटिल, राठौर, वीरभद्र और सुक्खू के सामने हुआ।
लगभग आधे घंटे तक इस हिंसक टकराव के बाद जैसे ही कार्यकर्ता शांत हुए तो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मंच से उठकर चले गए। मुकेश अग्निहोत्री, आशा कुमारी, कौल सिंह ठाकुर, सुधीर शर्मा सहित अन्य नेता भी उनके साथ वहां से चले गए। पार्टी प्रभारी पाटिल इन्हें रोकती रह गईं। इसके बाद रजनी पाटिल, राठौर, सुक्खू आदि ही मंच पर रह गए। काफी देर हंगामे के बाद राठौर ने पदभार ग्रहण किया।
पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी आपस में मारपीट कर रहे थे तो कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल मंच से उनसे शांत होने की अपील करती रहीं, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। कई कार्यकर्ता मंच के पास घेरा बनाए रहे, ताकि कोई मंच की ओर कोई ऐसी चीज न फेंके, जिससे बड़े नेता चोटिल हों। मुकेश अग्निहोत्री ने भी कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील की।