शिमला। शहर में विकास कार्य ठप होने लगे हैं। ठेकेदार नए टेंडरों का बहिष्कार कर रहे हैं। बीते शुक्रवार तक भी कई कार्यों के टेंडर कॉल किए गए थे, लेकिन एक भी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया। अब तक रास्तों, डंगों, ड्रेनेज सिस्टम आदि कार्यों से जुड़े करीब दो करोड़ रुपये के टेंडरों का बहिष्कार हो चुका है।
ठेकेदारों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती वह अपना बहिष्कार जारी रखेंगे। नगर निगम से निकलने वाले किसी भी टेंडर के लिए आवेदन नहीं करेंगे। ठेकेदार नगर निगम की ओर से दस फीसदी परफार्मेंस गारंटी लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। नगर निगम ने यह शर्त इसलिए लगाई है ताकि शहर में ठेकेदारों की लापरवाही से कामों में देरी न हो। निगम प्रशासन के अनुसार कई ठेकेदार समय पर काम पूरे नहीं कर रहे हैं। इससे जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है। काम समय पर पूरा होगा, इसके लिए अब ठेकेदारों को कुल राशि का दस फीसदी हिस्सा पहले निगम के पास परफार्मेंस गारंटी के तौर पर रखना होगा। यदि काम समय पर पूरा हुुआ तो निगम यह पैसा जारी कर देगा। लेकिन काम पूरा न होने की स्थिति में यह राशि जब्त हो जाएगी।
सोमवार को बुलाई ठेकेदारों की बैठक
ठेकेदारों ने नगर निगम प्रशासन से अब तक कई बार बातचीत कर ली है। लेकिन बात नहीं बन रही। अब सोमवार को ठेकेदार यूनियन फिर से बैठक करने जा रही है। ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि गारंटी की शर्त खत्म की जाए। कहा कि जब तक निगम उनकी मांग नहीं मानेगा, तब तक कोई ठेकेदार टेंडर के लिए आवेदन नहीं करेगा।
कोट
निगम के अधिशासी अभियंता सुधीर गुप्ता ने कहा कि ठेकेदारों से इस बारे में बात की जा रही है। सदन ने यह शर्त लगाने का फैसला लिया है। ऐसे में निगम इसके अनुसार ही टेंडर कॉल करेगा।