हिमाचल के किन्नौर जिले के शौंगटोंग प्रोजेक्ट से निकाले गए मजदूरों की बहाली को लेकर सीटू ने शुक्रवार को शिमला में पावर कारपोरेशन कार्यालय का घेराव कर डाला। कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में बैठे एमडी को अंदर ही बंधक बना लिया। करीब तीन बजे कार्यकर्ता अंदर घुस गए और एमडी ऑफिस में नारेबाजी शुरू कर दी। एमडी ने इन्हें समझाने की कोशिश लेकिन इनकी एक नहीं चली।
देर रात तक कार्यकर्ता एमडी ऑफिस में डटे रहे और एमडी को कमरे से बाहर नहीं देने जा रहे थे। स्थिति गंभीर होती देख एसपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे हैं। क्यूआरटी भी मौके पर प्रदर्शनकारियों पर नजर रखे हुई थी। एसपी ने भी कार्यकर्ताओं को समझाया लेकिन मजदूरों की बहाली को लेकर प्रदर्शन जारी रहा। तीन बजे से देर रात तक बीसीएस में एमडी कार्यालय में डटे मजदूरों और सीटू नेताओं ने कार्यालय में धरना- प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
एमडी को उनके कमरे में ही बंधक बना कर रखा। सीटू और मजदूर नेताओं की मांग थी कि शौंगटोंग प्रोजेक्ट से निकाले गए मजदूरों को काम पर रखा जाए और पिछले कई माह से देय ओवरटाइम, वेतन, पीएफ और हर तरह के वित्तीय देय लाभ भुगतान किया जाए। प्रदर्शनकारी पटेल कंपनी के अधिकारी के इंतजार में कार्यालय में डटे रहे। लेकिन इस दौरान बताया गया कि कंपनी के प्रतिनिधि 24 या 25 फरवरी को वार्तालाप करेंगे, लेकिन कार्यकर्ता इस बात पर अड़े रहे कि अभी उन्हें मौके पर बुलाए।
सीटू ने लगाए ये गंभीर आरोप, मजदूर भी आए साथ
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सीटू के राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट प्रबंधन लगातार मजदूर विरोधी नीतियों को अपना रहा है। कंपनी ने अपने हक की मांग कर संघर्ष कर रहे नौ सौ मजदूरों को निकला था। जिस पर सीटू ने मजदूरों के इस संघर्ष को पिछले करीब एक साल से बराबर आगे बढ़ाया और उन्हें न्याय दिलवाने के लिए मांग उठाई।
जिस पर लेबर कोर्ट ने भी कंपनी के मजदूरों निकाले जाने के फैसले को 18 मई 2016 को गलत करार दिया था। कंपनी को उन्हें वापस रखने का निर्णय दिया था। कंपनी ने कोर्ट आदेशों का पालन नहीं किया और मजदूर वापस काम पर नहीं रखे।
आरोप : आंदोलन खत्म करने बाद भी नहीं मिला न्याय
बीस सितंबर को न्यायालय ने मजदूरों के पक्ष में फैसला दिया। इसमें ओवरटाइम, वेतन और पीएफ भुगतान के आदेश दिए थे। इसमें न्यायालय ने मजदूरों को आंदोलन बंद करने को कहा था वहीं कंपनी को अगले तीन माह में तमाम मजदूरों की देनदारियों का भुगतान करने के आदेश भी दिए थे। मेहरा ने कहा कि मजदूरों ने न्यायालय के आदेशों का पालन कर आंदोलन बंद किया।
मगर आज तक वेतन और पीएफ व ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया गया। प्रदर्शन में शामिल सीटू नेताओं में राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा, पूर्व राज्य सचिव व पूर्व विधायक राकेश सिंघा, जगत राम, बिहारी सेवगी, सूर्य प्रकाश नेगी, संजय, जीवन, मदन दिनेश, फालमा चौहान, आशु सोनिया, किशोरी ढढवालिया, बलबीर पराशर सहित करीब ढाई सौ मजदूर और कार्यकर्ता कार्यालय में डटे रहे।