इस बार मां छिन्नमस्तिका जयंती पर मंदिर में श्रद्धालु नहीं आ पाएंगे। कोविड 19 गाइडलाइन के चलते मंदिर 23 अप्रैल से श्रद्धालुओं के लिए बंद पड़े हैं। इसलिए इस बार मंदिर में पूजा-अर्चना हवन, भोग आदि मंदिर के पुजारी ही करेंगे।
चिंतपूर्णी मंदिर में बुधवार को मां छिन्नमस्तिका जयंती मनाई जा रही है। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जा रहा है। पंजाब के एक श्रद्धालु ने मंदिर को फूलों से सजाने का काम करवाया है। सजावट के लिए छह लोगों को काम पर लगाया गया है। मंदिर में बुधवार सुबह हवन आहुतियां डाली जाएंगी। आचार्य डॉ. राम कुमार कौल, संदीप कालिया सहित कुछ अन्य पंडित हवन में भाग लेंगे। देश-विदेशों में फैलई महामारी के खात्मे के लिए मां चिंतपूर्णी के दरबार में प्रार्थना की जाएगी।
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डॉ. राम कुमार कौल व संदीप कालिया ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार हवन करने से वातावरण की शुद्धि होती है और रोग दोषों से मुक्ति मिलती है। हवन करने से देवी-देवताओं की शक्तियों में वृद्धि होती है जिससे ये हमें भी बल और बुद्धि और निरोगी काया प्रदान करते हैं। इस बार मां छिन्नमस्तिका जयंती पर मंदिर में श्रद्धालु नहीं आ पाएंगे। कोविड 19 गाइडलाइन के चलते मंदिर 23 अप्रैल से श्रद्धालुओं के लिए बंद पड़े हैं।
इसलिए इस बार मंदिर में पूजा-अर्चना हवन, भोग आदि मंदिर के पुजारी ही करेंगे। पुजारी संदीप कालिया ने बताया कि मंदिर में माता की जयंती के अवसर पर विशेष प्रकार से हवन डाला जाएगा और मां को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के भोग लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर में इस बार जयंती के अवसर पर सिर्फ पुजारी ही कोविड नियमों की पालना करने हुए भाग लेंगे।