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चीन की ये कैसी चाल, दलाईलामा से नफरत लेकिन करमापा पर चुप्पी

Wed, 07 Dec 2016 10:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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अपने सबसे बड़े शत्रु दलाईलामा से चीन बेशक नफरत करता है लेकिन क्या 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे से उसे ऐसी चिढ़ नहीं है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि 28 नवंबर से करमापा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर चीन ने अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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माना जाता है कि अगर दलाईलामा अपनी पद्ववि समाप्त करने की घोषणा करेंगे तो उनके बाद करमापा ही सबसे बड़े धर्मगुरु बन जाएंगे क्योंकि दूसरे बड़े धर्मगुरु पंचेन लामा वर्षों से चीन की कैद में हैं। ऐसे में दलाईलामा के मार्च 2017 में प्रस्तावित अरुणाचल दौरे पर तिलमिलनाने वाला चीन करमापा के हालिया अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर चुप क्यों है। 

इसको लेकर निर्वासित तिब्बत सरकार सहित भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी हैरत में हैं। करमापा दफ्तर के सचिव दोरजे नामग्याल खोरतसा ने करमापा के अरुणाचल दौरे की पुष्टि की है। इससे पहले नवंबर 2009 में दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर चीन ने अपनी भवें तरेरते हुए भारत को आपसी संबंधों में तनाव आने की चेतावनी दी थी। उसके बाद से किसी तिब्बती गुरु का यह अरुणाचल प्रदेश का पहला दौरा है।
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निर्वासित तिब्बत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां भी हैरत में पड़ीं

सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि वर्ष 2000 में जब तिब्बत से 19वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे भागकर आए थे तो वह भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के शक के रडार पर थे। इसलिए, उन पर भारत में कहीं भी घूमने पर प्रतिबंध था। लेकिन, अब करमापा दफ्तर के पुख्ता सूत्रों के अनुसार भारत सरकार की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक में करमापा को पहली बार पूरे भारत में कहीं भी घूमने की इजाजत दे दी है। 

प्रतिबंध हटने के बाद करमापा ने सबसे पहले भारत चीन के बीच विवाद के केंद्र अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया। लेकिन, हैरत है कि इस पर चीन दलाईलामा की तरह करमापा पर तिलमिलाया नहीं। 28 नवंबर को अरुणाचल दौरे पर गए करमापा पांच दिसंबर को वापस धर्मशाला अपने मठ में लौटेंगे। इसके बाद वह नौ दिसंबर से अपने गुरु ताई सितु रिंपोंछे के मठ शरबलिंग भट्टू में पहली बार जाएंगे। 
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900 वर्ष बाद अरुणाचल गए करमापा

17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे तीसरे करमापा के बाद पहले ऐसे करमापा हैं जो करीब 900 साल बाद अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर गए हैं। इससे पहले 13वीं शताब्दी में तीसरे करमापा रंगजूंग दोरजे अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर गए थे। 

इसलिए महत्वपूर्ण है तवांग- अरुणाचल प्रदेश को चीन हमेशा से दक्षिण तिब्बत का भाग बताकर अपना उस पर हक जताता है। नवंबर 2009 में जब दलाईलामा ने अरुणाचल प्रदेश में एशिया की सबसे बड़े बौद्ध मठ का दौरा किया था तो उस वक्त भी चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 

अब उसके बाद फिर से चीन आपत्ति जता रहा है। दलाईलामा 1959 में तिब्बत से अरुणाचल के तवांग से होकर भागकर भारत आए थे। तवांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर सदियों पहले एक दलाईलामा का जन्म हुआ था। इसलिए, यहां के लोग दलाईलामा को अपना भगवान मानते हैं।
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