कारण यह है कि वह 15 अप्रैल 2026 को तीन वर्ष से अधिक आयु पूरी कर लेगा, जो 30 सितंबर 2026 से पहले है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई बच्चा वर्तमान सत्र 2026-27 में किसी प्री-प्राइमरी कक्षा में पहले से पढ़ रहा है और वह 30 सितंबर 2026 तक अगली कक्षा के लिए निर्धारित आयु पूरी कर लेता है, तो उसे आयु के अनुसार अगली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे की जन्मतिथि 25 अगस्त 2020 है और वह इस समय बालवाटिका दो या बालवाटिका तीन में पढ़ रहा है, तो वह कक्षा पहली में प्रवेश के लिए पात्र होगा क्योंकि वह 30 सितंबर 2026 से पहले 6 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर लेगा। हालांकि ऐसी स्थिति में अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होगी। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि नर्सरी और बालवाटिका एक से पहली कक्षा तक प्रवेश के लिए संशोधित आयु मानदंड और 30 सितंबर की कट-ऑफ तिथि राज्य के सभी स्कूलों पर अनिवार्य रूप से लागू होंगे। इसमें सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूल शामिल हैं।
नियम तोड़ने पर उपनिदेशकों को करें शिकायत
यदि कोई स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करता है तो प्रभावित अभिभावक संबंधित जिले के उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा के पास अपील कर सकते हैं। विभाग के अनुसार उपनिदेशक का निर्णय सभी स्कूलों के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगा। शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी स्कूल की ओर से नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ आरटीई हिमाचल प्रदेश नियम-2025 में कार्रवाई की जाएगी।