डाक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है। लेकिन अगर डाक्टर ही मरीज से अछूत से व्यवहार करने लगे तो क्या होगा? ऐसा ही एक वाक्या आईजीएमसी अस्पताल के बाल रोग विभाग में सामने आया है।
यहां उपचार के लिए आए एक दस साल के लड़के को जनरल वार्ड से हटाकर आइसोलेशन में रख दिया। यह बच्चा एचआईवी से पीड़ित है।
प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस बात की जानकारी है कि एचआईवी एक साथ रहने या छूने से नहीं फैलता। इन्हें भी सामान्य लोगों के बीच रहने का हक है और इनके प्रति किसी तरह का कोई पक्षपात पूर्ण रवैया नहीं रखा जा सकता।
बावजूद इसके आईजीएमसी के डाक्टरों ने बच्चे को अलग रखकर साबित कर दिया है कि करनी और कथनी में कितना फर्क है। यही डाक्टर जब किसी मंच पर चढ़ते हैं तो कहते हैं कि एचआईवी से पीड़ित लोगों से दूर रहने की जरूरत नहीं।
यह छूने या साथ रहने से नहीं फैलता। उधर, मीडिया से मामले की जानकारी मिलने के बाद बाल रोग महकमा कुछ भी बोलने को फिलहाल तैयार नहीं है। इतना जरूर मान रहे हैं कि एचआईवी से पीड़ित बच्चे को अलग रखना नियमों के खिलाफ है।