हिमाचल प्रदेश में खेलने-कूदने की उम्र में बच्चे मानसिक कमजोरी को शिकार हो रहे हैं। सूबे में 6 से 10 साल के बच्चों के मानसिक रूप से कमजोर होने का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से 3 गुना ज्यादा पाया गया है। राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॅालेज टांडा के विशेषज्ञों की रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। रिसर्च के अनुसार मानसिक कमजोरी के सर्वाधिक मामले शहरी क्षेत्रों की गंदी बस्तियों में सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो खानपान में कमी व घरेलू हालात खराब होना इसकी प्रमुख वजह है। परीक्षण में 5300 बच्चों में से 91 (1.72 प्रतिशत) बच्चे मानसिक रूप से कमजोर पाए गए। इनमें 6 से 10 साल तक के बच्चों में यह समस्या 1 से 3 साल के बच्चों की अपेक्षा छह गुना ज्यादा सामने आई। खास बात यह है कि यह समस्या लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में ज्यादा पाई गई। राष्ट्रीय स्तर पर इस आयु वर्ग के औसतन 0.53 फीसदी फीसदी बच्चे मानसिक रूप से कमजोर पाए गए हैं।
ये रहे रिसर्च में शामिल
इस रिसर्च में डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर अशोक कुमार भारद्वाज, एसोसिएट प्रोफेसर सुनील कुमार रैना, रेजीडेंट शैलजा शर्मा के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक्स के प्रोफेसर विपाशा कश्यप और क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट विश्व चंद्र शामिल रहे।