फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन: मोबाइल की लत छुड़ाने भी नशा निवारण केंद्र पहुंच रहे किशोर, जानें बच्चों को कैसे बचाएं

Wed, 15 Jul 2026 05:50 AM IST
Krishan Singh गौरीशंकर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

 प्रदेश के भुंतर स्थित नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र में एक साल के भीतर ऐसे आठ बच्चे और किशोर भर्ती किए गए हैं जो इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन के शिकार हुए हैं।
विज्ञापन
बच्चों में बढ़ रहा इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मोबाइल की लत भी एक नशा। यदि आपका बच्चा मोबाइल का ज्यादा उपयोग कर रहा है तो सावधान हो जाइए। वह इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन का शिकार हो सकता है। प्रदेश के भुंतर स्थित नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र में एक साल के भीतर ऐसे आठ बच्चे और किशोर भर्ती किए गए हैं जो इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन के शिकार हुए हैं। इनमें 14 से 22 साल तक किशोर शामिल हैं। केंद्र में इन बच्चों का डॉ. सत्यव्रत वैद्य राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क तंत्रिका विज्ञान संस्थान बंगलूरू के शट क्लीनिक (सर्विस फॉर हेल्थी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी) की सलाह पर उपचार कर रहे हैं।

विज्ञापन

क्या बोले डॉ. सत्यव्रत वैद्य
डॉ. सत्यव्रत वैद्य का कहना है कि केंद्र में लाए गए इन बच्चों और किशोरों में इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन पाई गई है। बच्चों में अलग-अलग असर देखने को मिले हैं। इसमें कुछ बच्चे ऐसे हैं जो मोबाइल के अलावा किसी भी चीज या विषय पर ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं। दो बच्चे ऐसे हैं जिन्हें मोबाइल से डर लगने लगा है कि मोबाइल फोन उनकी हर बात सुन रहा है। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो मोबाइल के बिना दस-पंद्रह मिनट भी नहीं रह पा रहे हैं। 
 

थेरेपी और दवाइयों से उपचार
डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन के शिकार हुए छोटे बच्चों को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) के माध्यम से उपचार किया जा रहा है। जो बड़े बच्चे हैं, उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं। ये सभी रूटीन चेकअप के लिए समय-समय पर केंद्र पहुंच रहे हैं।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन
जब कोई व्यक्ति मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म या अन्य डिजिटल उपकरणों का इतना अधिक उपयोग करने लगता है कि उसका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे तो उसे इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन कहा जाता है।
विज्ञापन

कैसे बचाएं बच्चों को
डॉ. सत्यव्रत वैद्य का कहना है कि इससे अपने बच्चों को बचाने के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें। भोजन और सोने के समय मोबाइल से दूरी रखें। नियमित व्यायाम और बाहरी गतिविधियों में भाग लें। परिवार अपने बच्चों के साथ समय बिताएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें