क्या बोले डॉ. सत्यव्रत वैद्य
डॉ. सत्यव्रत वैद्य का कहना है कि केंद्र में लाए गए इन बच्चों और किशोरों में इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन पाई गई है। बच्चों में अलग-अलग असर देखने को मिले हैं। इसमें कुछ बच्चे ऐसे हैं जो मोबाइल के अलावा किसी भी चीज या विषय पर ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं। दो बच्चे ऐसे हैं जिन्हें मोबाइल से डर लगने लगा है कि मोबाइल फोन उनकी हर बात सुन रहा है। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो मोबाइल के बिना दस-पंद्रह मिनट भी नहीं रह पा रहे हैं।
थेरेपी और दवाइयों से उपचार
डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन के शिकार हुए छोटे बच्चों को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) के माध्यम से उपचार किया जा रहा है। जो बड़े बच्चे हैं, उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं। ये सभी रूटीन चेकअप के लिए समय-समय पर केंद्र पहुंच रहे हैं।
क्या है इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन
जब कोई व्यक्ति मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म या अन्य डिजिटल उपकरणों का इतना अधिक उपयोग करने लगता है कि उसका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे तो उसे इलेक्ट्रॉनिक एडिक्शन कहा जाता है।
कैसे बचाएं बच्चों को
डॉ. सत्यव्रत वैद्य का कहना है कि इससे अपने बच्चों को बचाने के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें। भोजन और सोने के समय मोबाइल से दूरी रखें। नियमित व्यायाम और बाहरी गतिविधियों में भाग लें। परिवार अपने बच्चों के साथ समय बिताएं।