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महिला ने बेटे को दिया जन्म, अस्पताल ने थमा दी बेटी, 3 माह बाद खुली पोल

Fri, 26 Aug 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी शिमला के कमला नेहरू अस्पताल में किसी और का बच्चा थमाकर महिला को घर भेज दिया गया। इसकी पोल उस वक्त खुली, जब दंपति ने डीएनए टेस्ट करवाया और दोनों का डीएनए बच्ची से मैच नहीं हुआ।
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मंडी निवासी अनिल की पत्नी शीतल आईजीएमसी में कार्यरत हैं। 26 मई को शीतल की डिलीवरी रात 11:10 बजे कमला नेहरू अस्पताल में हुई थी। मां को जब बच्चा सौंपा गया तो कहा गया कि बेटी पैदा हुई है।

मगर डिलीवरी के समय बताया गया कि बेटा हुआ है। मौके पर मौजूद अटेंडेंट को भी बेटी होने की बात बताई गई। इससे शीतल के पति अनिल ठाकुर के मन में शंका घर कर गई।
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डीएनए टेस्ट करवाने का लिया फैसला

दंपति ने इस शंका को दूर करने के लिए एक निजी लैब से मां और बेटी का डीएनए करवाने का फैसला लिया। 13 जून को डीएनए टेस्ट करवाया। इसकी 27 जून को रिपोर्ट आई। इसे अनिल ने 28 को लिया।

रिपोर्ट में मां का डीएनए बच्ची के साथ मैच नहीं हुआ। 15 जुलाई 2016 को उन्होंने दूसरी बार फिर से निजी लैब में डीएनए टेस्ट करवाया। इस रिपोर्ट में भी मां, पिता से बच्ची का डीएनए मैच नहीं हुआ।
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अभी तक दर्ज नहीं हुआ मामला

अनिल ने अस्पताल के एमएस से मामला उठाया। एमएस ने मामले की छानबीन को कमेटी गठित करने का भरोसा दिया। इंतजार के बावजूद 13 जुलाई तक जांच कमेटी की रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली तो अनिल ने एसपी शिमला से मामला उठाया। यहां से थाना छोटा शिमला प्रभारी को दिशा-निर्देश दिए गए। बताया कि 4 अगस्त को दोबारा थाने में जाकर एसएचओ से मिले, मगर उनकी शिकायत पर मामला तक दर्ज नहीं किया गया है।

आरोप, अस्पताल प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई
अनिल ने बताया कि अस्पताल में दी शिकायत के बावजूद कमेटी की न तो उन्हें रिपोर्ट मिली है और न ही उनका डीएनए करवाया गया है। अनिल का आरोप है कि अस्पताल में जाने पर एमएस और विभागाध्यक्ष दोनों मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। तीन महीने से वे इसका इंतजार कर रहे है। दंपति ने इंसाफ की गुहार लगाई है।

कमला नेहरू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एलएस चौधरी ने कहा कि अस्पताल स्तर पर बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट में बच्चा बदले जाने जैसा कुछ भी नहीं निकला है। पुलिस अपने स्तर पर मामले की छानबीन कर रही है। जांच में अस्पताल प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है।
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