लेकिन, मां अपने साथ इस बच्चे को नहीं ले गई। अब अंश की मां न ही बच्चे को अपने साथ ले जा रही है और न ही उसकी रजामंदी के बिना उसे किसी को गोद दिया जा सकता है। ऐसे में मामला कोर्ट में है।
लेकिन, इसके बाद अंश की मां एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुई। इससे अंश की मां की कोर्ट में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। हालांकि, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और जिला बाल संरक्षण कमेटी सहित अन्य कई बैठकों में भी अंश का मामला उठ चुका है।
लेकिन, मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।जिला बाल संरक्षण कमेटी के माध्यम से ही बच्चा गोद लेने के लिए अभी भी जिले से आठ दंपती इंतजार में हैं, जबकि इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन करने वाले दंपती अलग से हैं।
यदि मास्टर अंश का मामला सुलझ जाता है, तो न केवल बच्चा गोद लेने वालों की कतार में लगे किसी एक दंपती की गोद भर सकती है बल्कि अंश को भी माता-पिता का प्यार मिल सकेगा।
मास्टर अंश का मामला कोर्ट में लंबित है। कोर्ट के फैसले के बाद ही अंश के मामले में कोई कार्रवाई हो सकती है। - केएस धीमान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी