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कैट में CS का वरिष्ठता विवाद खत्म, इन आईएएस की पदोन्नति की होगी समीक्षा

Tue, 20 Feb 2018 12:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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वीरभद्र सरकार में मुख्य सचिव पद पर तैनाती के दौरान वरिष्ठता की अनदेखी का मामला केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में खत्म हो गया है। याचिकाकर्ता और वर्तमान में जयराम सरकार के मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने ट्रिब्यूनल से केस वापस ले लिया है।

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कैट ने विनीत चौधरी के मुख्य सचिव बनने पर मसला खत्म होने की बात कही, लेकिन चौधरी के अनाधिकृत रूप से कई प्रधान सचिवों को एक साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाने पर ट्रिब्यूनल ने डीओपीटी से दो माह में रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में इस अवधि में प्रधान सचिव से अतिरिक्त मुख्य सचिव बने 16 आईएएस अफसरों की पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।  

याचिकाकर्ता विनीत चौधरी ने पूर्व सरकार के समय में सीएस की तैनाती में वरिष्ठता अनदेखी के साथ अनाधिकृत रूप से अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनातियों के आरोप लगाए थे।
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मुख्य सचिव ने मामला वापस तो ले लिया, लेकिन इस मसले को केंद्र सरकार में उठाने की छूट मांगी। कैट ने मुख्य सचिव को इसकी छूट देने के साथ दूसरे विषय पर केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को दो महीने में इस पर फैसला लेने के लिए कहा है।

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अब दूसरे मामले में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से राज्य में पूर्व सरकार के समय में प्रधान सचिव से अतिरिक्त मुख्य सचिव बने 16 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता रिव्यू होगी  राज्य में पहली बार बड़ी संख्या में अतिरिक्त मुख्य सचिवों की तैनाती की गई थी।

इससे पहले राज्य में तीन अतिरिक्त मुख्य सचिव होते थे। इसके बाद वीरभद्र सिंह की सरकार में कैबिनेट से अतिरिक्त मुख्य सचिव के पदों को स्वीकृति दी। कैबिनेट के फैसले के आधार पर तत्कालीन सरकार में 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले 1983 और 1984 बैच के आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति की, जिस आधार पर बाद में 1986 बैच के आईएएस एसीएस बने।

ऐसी स्थिति में तत्काल में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर सेवाएं दे रहे कई आला आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति पर प्रदेश को जवाब देना होगा। मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने कहा कि उन्होंने कैट में वरिष्ठता की अनदेखी का दायर मामला वापस ले लिया है। 
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