अब दूसरे मामले में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से राज्य में पूर्व सरकार के समय में प्रधान सचिव से अतिरिक्त मुख्य सचिव बने 16 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता रिव्यू होगी राज्य में पहली बार बड़ी संख्या में अतिरिक्त मुख्य सचिवों की तैनाती की गई थी।
इससे पहले राज्य में तीन अतिरिक्त मुख्य सचिव होते थे। इसके बाद वीरभद्र सिंह की सरकार में कैबिनेट से अतिरिक्त मुख्य सचिव के पदों को स्वीकृति दी। कैबिनेट के फैसले के आधार पर तत्कालीन सरकार में 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले 1983 और 1984 बैच के आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति की, जिस आधार पर बाद में 1986 बैच के आईएएस एसीएस बने।
ऐसी स्थिति में तत्काल में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर सेवाएं दे रहे कई आला आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति पर प्रदेश को जवाब देना होगा। मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने कहा कि उन्होंने कैट में वरिष्ठता की अनदेखी का दायर मामला वापस ले लिया है।