उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वन भूमि बढ़ाने पर व्यापक कार्य हो रहा है। सरकार ने 2030 तक प्रदेश की वन भूमि को 28 फीसदी से बढ़ाकर 32 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में हिमाचल की 68 फीसदी वन भूमि में से 28 फीसदी पर घने जंगल हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राजीव गांधी वन संवर्धन योजना पौधारोपण को समयावधि और योजनाबद्ध तरीके से विकसित करेगी। योजना के तहत महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और युवक मंडलों को शामिल किया जाएगा। इन्हें एक हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाने के लिए 1,40,000 रुपये दिए जाएंगे। यदि लगाए गए 100 पौधों में से 50 बचते हैं, तो समूह को एक लाख रुपये मिलेंगे।
उन्होंने इस दौरान हिमाचल प्रदेश के 75 ईको-टूरिज्म स्थलों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इस दौरान फील्ड हैंडबुक वन बोध, प्रधान मुख्य अरण्यपाल और बल प्रमुख डॉ. संजय सूद की लिखित एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट एंड रेगुलेशंस, फॉरेस्ट्री प्रोजेक्ट्स, फॉरेस्ट कंजर्वेशन, लाइवलीहुड इम्प्रूवमेंट एंड इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट किताबों का विमोचन किया।
इस अवसर पर विधायक विनोद सुल्तानपुरी, सुदर्शन बबलू और हरदीप बावा, डीसी अनुपम कश्यप, महापौर सुरेंद्र चौहान, वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केएस खाची, विनोद जिंटा, मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान मुख्य अरण्यपाल और बल प्रमुख डॉ. संजय सूद और अन्य अतिथि उपस्थित थे।