मुख्य निर्वाचन अधिकारी देवेश कुमार
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19 मई को प्रदेश के 7723 मतदान केंद्रों पर होने वाले मतदान के दौरान दिव्यांग मतदाताओं की मदद के लिए एनएसएस व एनसीसी कैडेटों की तैनाती की जाएगी। हर दिव्यांग के साथ मतदान केंद्र के अंदर एक कैडेट चलेगा और जरूरत के अनुसार सहयोग देगा। ऐसे मतदाता को लाइन में भी नहीं लगना पड़ेगा।
लोकसभा चुनावों में पहली बार दिव्यांग मतदाताओं का चुनाव आयोग ने सर्वे कराया है। इस सर्वे में उनकी दिव्यांगता को समझते हुए बूथ स्तरीय अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मचारियों की मदद से डेटा तैयार किया गया है। वर्तमान में करीब 18,200 दिव्यांग मतदाता चिह्नित किए जा चुके हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी देवेश कुमार ने बताया कि इस सूची को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, स्वास्थ्य व निर्वाचन विभाग के वर्तमान डेटा के आधार पर सर्वे कराने के बाद तैयार किया गया है। अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार लोकोमोटिव श्रेणी के दस हजार मतदाता सामने आए हैं। वहीं, दो हजार मतदाता ऐसे मिले हैं जो सुनने या बोलने में अक्षम हैं।
हजार से ज्यादा मतदाताओं को विभिन्न तरह की परेशानी है। देवेश ने कहा कि डोर टू डोर सर्वे कराकर यह जानने की कोशिश की गई है कि ऐसे हर मतदाता को बूथ पर किस तरह की मदद की आवश्यकता रहेगी। वहीं, पीडब्ल्यूडी ऐप के जरिये भी मतदाताओं से अपील की गई है कि वे पंजीकरण करा लें ताकि चुनाव के दिन उनको पर्याप्त व उचित मदद मुहैया कराई जा सके। इस चुनाव में ब्रेल साइन वाले बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
विधानसभा चुनाव में थे 13 हजार
सीईओ ने बताया कि 2017 के विधानसभा के चुनावों के दौरान दिव्यांग मतदाताओं की संख्या करीब 13 हजार थी। विधानसभा चुनावों के दौरान भी हिमाचल ने पहली बार एनसीसी व एनएसएस कैडेटों को इन मतदाताओं के सहयोग के लिए तैनात किया था। बताया कि इस चुनाव में इन्हें वाहन के जरिये मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए भी विचार किया जा रहा है।