हिमाचल में बगैर लाइसेंस के फलों और सब्जियों पर इस्तेमाल होने वाले रसायन कैसे बिक रहे हैं। इस मामले में सरकार गंभीर हो गई है। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने इसका कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुकानों पर छापामारी होगी जो कानून तोड़कर ऐसे रसायनों को बेच रही हैं, जिन्हें केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और अन्य एजेंसियों की मंजूरी नहीं मिली है।
प्रदेश में इस बार कुछ लोगों ने सेब के पौधों में बेहतरीन फल सेटिंग की बातें कर रसायनों को मनमाने दामों पर बेचा है। दावा यह किया है कि ये विदेश से लाए गए हैं। विदेश से कैसे लाए गए हैं, इसका कोई अता-पता नहीं है।
इस रसायन की कई बागवानों ने हैवी डोज डाल दी, जिससे उनके बगीचों में सेब के फल तो खूब लगे, मगर मौसम के अनुकूल नहीं रहने के कारण ये झड़ गए। इससे अंधाधुंध सेब ड्रॉपिंग होने से सेब बागवान परेशान हो गए हैं। अमर उजाला में भी यह मामला प्रमुखता से उजागर किया।
मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने कहा है कि यह गंभीर मामला है। अगर कोई भी दुकानदार बगैर लाइसेंस, बिना कीटनाशक बोर्ड और अन्य प्राधिकृत एजेंसियों की मंजूरी वाले कीटनाशक या कोई अन्य रसायन बेच रहा है तो यह अपराध है। इस पर कार्रवाई होगी।
फलों पर लंबे परीक्षण के बाद ही इस्तेमाल हो सकती है कोई दवा
हिमाचल में फलों पर लंबे परीक्षण के बाद ही कोई दवा इस्तेमाल की जा सकती है। केंद्र सरकार के केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण कमेटी से प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही प्रदेश में किसी दवा को बेचा जा सकता है।
सेब के फलों पर केवल वही रसायन इस्तेमाल हो सकते हैं जो स्प्रे शेड्यूल में शामिल हैं। स्प्रे शेड्यूल में तीन या चार साल के परीक्षण के बाद ही कोई रसायन शुमार होता है। यह देखना जरूरी है कि इसका मानव, पशु या वातावरण पर कोई बुरा प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।